लखनऊ, 19 अक्टूबर 2018: नदियां हमारे लिए कितनी जीवनदायिनी, इस बात का अंदाजा हम इस बात से लगा सकते हैं कि यदि घरों में कुछ दिन पानी न आये तो प्यासे मरने की नौबत आ जाए, और ऐसे में हम फिर इन नदियों के पानी का ही सहारा लेगें। लेकिन स्थिति तब और भयावह हो जाती है जब इन बहती नदी का पानी इतना दूषित मिले की पानी पीना दूभर हो जाए तो आप क्या करेंगे?

ऐसे में आप यही सोचेंगे कि काश हमने नदियां साफ़ रखी होती तो यह नौबत न आती! आज आस्था के नाम पर जो पॉलीथिन युक्त कचरा नदी में हम समाहित कर रहे हैं वह हमारे लिए और आने वाली नई पीढ़ी के लिए कितना खतरनाक है यह सोच कर ही दर लगता है, लेकिन अब भी कुछ नहीं बिगड़ा है जब जागो तब सबेरा है।
संकल्प लें, अब नदी में आस्था के नाम पर कचरा नहीं डालेंगें और न ही वह प्रदुषण युक्त पेण्ट से रंगी प्लास्टर ऑफ पेरिस से बनी रंगीन आकर्षित मूर्तियां जिनका रंग छूटते ही ढेरों निरीह मछलियां मर जाती हैं और इसके साथ ही पानी भी जहरीला हो जाता है।







