पाकिस्तान की दोहरी नीति एक बार फिर बेनकाब
इस्लामाबाद: पाकिस्तान के पूर्व तेज गेंदबाज शोएब अख्तर के भाई शाहिद अख्तर के जनाजे में आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के शीर्ष नेताओं की मौजूदगी ने पाकिस्तान की आतंकियों को पनाह देने वाली नीति को एक बार फिर उजागर कर दिया है।
जानकारी के अनुसार जनाजे में लश्कर-ए-तैयबा के प्रमुख चेहरे शामिल हुए, जिसकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। यह घटना उन दावों को खोखला साबित करती है जिनमें पाकिस्तान खुद को आतंकवाद के खिलाफ बताता है, जबकि हकीकत में वह आतंकियों को संरक्षण देता रहा है।
पाकिस्तान की पुरानी समस्या
लश्कर-ए-तैयबा 26/11 मुंबई हमले समेत भारत के खिलाफ कई बड़े आतंकी हमलों का जिम्मेदार माना जाता है। पाकिस्तान पर लंबे समय से आरोप लगता रहा है कि वह ऐसे संगठनों को न सिर्फ पनाह देता है बल्कि उन्हें राजनीतिक और सामाजिक संरक्षण भी उपलब्ध कराता है।
शोएब अख्तर के परिवार से जुड़े इस कार्यक्रम में आतंकियों की खुली मौजूदगी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान खींचा है। यह घटना दिखाती है कि पाकिस्तान में आतंकवाद और मुख्यधारा की जिंदगी के बीच की दूरी लगातार मिटती जा रही है।
यह मामला एक बार फिर सवाल उठाता है कि पाकिस्तान कब तक आतंकवाद को राज्य नीति का हिस्सा बनाए रखेगा?







