डॉ दिलीप अग्निहोत्री
किसानों की आय दो गुनी करने के प्रति केंद्र सरकार कटिबद्ध है। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने भी इस दिशा में कारगर कदम उठाए है। अनेक बिंदुओं पर प्रदेश का रिकार्ड बेहतर हुआ है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मात्र डेढ़ वर्ष में अनेक सुधार करके दिखा दिए। इसी क्रम में कृषि कुंभ का आयोजन अभिनव प्रयोग था। राजधानी लखनऊ में तीन दिवसीय कृषि कुंभ का आयोजन किया गया। इसमें लाखों किसानों को परंपरागत खेती के अलावा अधिक मुनाफा देने वाली फसलों व तकनीक की जानकारी दी गई। कृषि की लागत घटाने और उत्पादन बढ़ाने के तरीके बताए गए। इस कार्य में भारत के अलावा जापान और इस्राइल के कृषि विशेषज्ञ सहयोग कर रहे थे।योगी आदित्यनाथ ने कृषि को अपनी उच्च प्राथमिकता में शामिल किया था। यही कारण है कि मात्र डेढ़ वर्ष में अनेक रिकार्ड बन गए। खाद्यान्न खरीद और मृदापरिक्षण के रिकॉर्ड बने, इस्राइल के सहयोग से हुए कार्यो का लोकार्पण हुआ, जापान से कृषि सहयोग पर समझौता हुआ।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कृषि कुंभ में गन्ना उत्पादन, हार्टीकल्चर और दुग्ध उत्पादन में भी उत्तर प्रदेश प्रथम स्थान है। योगी ने इजरायल के सहयोग से बने सेंटर फॉर एक्सीलेंस का उद्घाटन किया। इजरायल से मिली तकनीक का सभी विभाग बेहतर उपयोग कर रहे है। केंद्र सरकार ने बीस नए कृषि विज्ञान केंद्र उत्तर प्रदेश में स्थापित करने की स्वीकृति दे दी है।छोटे जनपद में एक और बड़े जनपदों के लिए दो केंद्र खोलने की दिशा में कार्य हो रहा है। नई चीनी मिलों को संचालित करने के लिए भी सरकार ने तैयारी कर ली है। डेढ़ वर्ष के भीतर प्रदेश में रिकार्ड संख्या में किसानों को स्वाइल हेल्थ कार्ड जारी किए गए। करीब दो लाखह रकबे के सिंचाई की व्यवस्था भी की है। किसानों के सहयोग से उत्तर प्रदेश को फिर से पहले पायदान पर लाकर खड़ा कर सकते हैं।

प्रबंधन के मामले इजराइल का और प्रसंस्करण के मामले में जापान अग्रणी देश हैं। दोनों सहयोगी देश के रूप में मौजूद थे।जापान से प्रसंस्करण के क्षेत्र में पांच वर्ष के लिए समझौता भी हुआ। कम पानी से अधिक उत्पादन की इस्राइली तकनीक विश्व में प्रसिद्ध है। पिछले दिनों इस्राइल के प्रधानमंत्री वेंजमींन नेतन्याहू भारत यात्रा के दौरान आगरा भी आये थे। यहां योगी आदित्यनाथ ने उनसे कृषि क्षेत्र में सहयोग की पेशकश की थी। तभी तय हुआ कि इस्राइल पूरा सहयोग करेगा। पिछले दिनों उंसकी विशेषज्ञ टीम बुंदेलखंड दौरे पर आई थी। कम पानी और अधिक उत्पादन की तकनीति बुंदेलखंड की तस्वीर बदल सकती है। प्रदेश के अन्य क्षेत्रों को भी इसका बड़ा लाभ मिलेगा। कृषि कुंभ में किसानों को इन सभी गतिविधियों से परिचित कराया गया।
कृषि कुंभ में किसानों को खेती की आधुनिक तकनीक के बारे में बताया गया। भारतीय गन्ना अनुसंधान में खेती के विभिन्न मॉडलों के बारे में जानकारी दी गई। सरकार की मंशा वर्ष किसानों की आय दोगुना करना है, आयोजन का मकसद भी यही है। इसमें आयोजित चौदह तकनीकी सत्र आयोजित किये गए। खेती से जुड़े विभागों द्वारा विभागीय और एकीकृत खेती के जीवंत मॉडल फार्म इसमें उपयोगी साबित हुए।

यह निर्णय हुआ कि कृषि विकास के लिहाज से कम वृद्धि दर वाले सात जिलों के लिए विशेष योजना भी चलाई जाएगी। फसल अवशेष प्रबंधन से संबंधित आठ में से कोई तीन कृषि यंत्र खरीदने पर किसानों को अस्सी प्रतिशत तकतक छूट मिलेगी। योजना का लाभ लेने के लिए सात नवंबर तक यंत्र खरीदने होंगे। इस अवधि तक हर हाल में पोर्टल पर खरीद की रसीद अपलोड करनी होगी। ये आठ यंत्र हैं- रोटावेटर, जीरो सीड कम फर्टिलाइजर ड्रिल, हैपी सीडर, मल्चर, पैडी स्ट्रॉ चॉपर, श्रेडर, श्रव मास्टर, रिवर्सिबल मोल्ड बोर्ड प्लाऊ। किसानों को कृषि एवं विभिन्न क्षेत्रों के विकसित नवीनतम तकनीक गुणवत्ता युक्त कृषि निवेश खाद्य प्रसंस्करण कृषि विपणन की इ-मार्केटिंग पद्धति की जानकारी दी गई। इसमें रेशम विभाग की शहतूत एवं अर्जुन के वृक्षारोपण से रेशम किट पालन तथा रेशम उत्पादन की पद्धतियों को दर्शाती प्रदर्शनी आयोजित की गई।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के विभिन्न संस्थान, कृषि विश्वविद्यालयों तथा अन्य शोध संस्थानों के स्टाल लगाए गए। जिनसे किसानों को नवीनतम एवं लाभकारी कृषि के तकनीक की जानकारी प्राप्त हुई। कृषि कुम्भ में भूमि संरक्षण जैविक खेती, हरी खाद, परंपरागत खेती,सोलर पंप, सामाजिक वानिकी आदि विषयक प्रदर्शनी स्थापित की गई थी। इसमें प्रदेश की लघु एवं सीमांत कृषकों की छोटी जोत को लाभकारी उद्यम बनाने के उद्देश्य से एकत्रित फसल प्रणाली विषयक पर भी प्रदर्शनी लगाई गई थी। इसमें बताया गया कि एक एकड़ खेत में मक्का की खेती एवं अन्य सब्जियों की खेती का लाभ तथा केला और पपीता की खेती के साथ ही पशुपालन कर अपनी आय दोगुनी कर सकते हैं।
प्रधानमंत्री ने वीडियो कांफ्रेसिंग से कृषि कुंभ के उद्घाटन को संबोधित किया था। उन्होंने किसानों की बेहतरी के लिए योगी सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। कहा कि उत्तर प्रदेश के किसान उत्पादन का रिकॉर्ड बनाते जा रहे हैं तो योगी सरकार भी खरीद का रिकॉर्ड तोड़ती जा रही है। इस बार गेहूं की लगभग पचास लाख मीट्रिक टन खरीद की गई है, जबकि पहले की सरकारों में मात्र सात से आठ लाख मीट्रिक टन की ही खरीद होती थी। सरकार ने रबी व खरीफ की इक्कीस फसलों के समर्थन मूल्य में ऐतिहासिक बढ़ोतरी की है। इन फसलों पर लागत का कम से कम पचास प्रतिशत सीधा लाभ किसानों को मिले यह तय किया गया है।
मोदी ने कहा कि गन्ने की खरीद प्रक्रिया को लेकर भी परिवर्तन स्पष्ट दिख रहा है। इस सीजन का करीब सत्ताईस हजार करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किसानों को किया जा चुका है। इतना ही नहीं, पिछले बकाए में भी ग्यारह हजार करोड़ रुपये किसानों को दिए जा चुके हैं। नरेन्द्र मोदी ने कहा कि मुझे यह जानकर भी खुशी हुई कि यूपी सरकार ने पहली बार आलू खरीदने का भी फैसला किया है। इससे निश्चित तौर पर उन किसानों को लाभ मिलने वाला है जिनको आलू का उचित दाम नहीं मिलता था।
उत्तर प्रदेश की विपक्षी पार्टी तंज कसने लगे तो समझ लेना चाहिए कि सरकार के प्रयास कारगर है। जो सरकारी खरीद में कई गुना पीछे थे, वह कृषि कुंभ पर तंज कस रहे है। उन्होंने इसे किसानों के साथ छल बताया था। किसानों को कम लागत से अधिक उत्पादन लेने की तकनीक से परिचित कराना उनके साथ छल कैसे हो सकता है।







