पावर कारपोरेशन सहित उपभोक्ता परिषद ने रखे अपने तर्क फैसला सुरक्षित
लखनऊ, 30 नवंबर 2018: नियामक आयोग द्वारा प्रस्तावित सोलर रूट टाप रेग्यूलेशन, 2019 पर आज आयोग सभागार में सार्वजनिक सुनवाई नियामक आयोग अध्यक्ष राज प्रताप सिंह व सदस्य कौशल किशोर शर्मा एवं सचिव संजय श्रीवास्तव की उपस्थित में सम्पन्न हुयी। जिसमें पावर कारपोरेशन की तरफ से निदेशक वाणिज्य एके श्रीवास्तव, प्रदेश के उपभोक्ताओं की तरफ से उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा, सोलर पावर लगाने वाले प्रतिनिधियों सहित अन्य उपभोक्ता प्रतिनिधि उपस्थित थे। आयोग ने सुनवाई के बाद फैसला रिजर्व कर लिया है। आने वाले समय में जल्द ही प्रदेश में नया सोलर रूट टाप रेग्यूलेशन, 2019 आयेाग के फाइनल निर्णय के बाद लागू हो जायेगा।
उप्र पावर कारपोरेशन जहाॅं प्रस्तावित रेग्यूलेशन में अनेकों बदलाव पर अपनी बात रखी और यह भी मुददा उठा दिया कि सोलर रूट टाप पावर नेट मीटरिंग पर जो उपभोक्ता उपभोग के बाद साल के अन्त में सेटेलमेन्ट के बाद जो अतिरिक्त बिजली विभाग को देंगे उन्हें रू. 2 प्रति यूनिट जो दिया जाता है वह समाप्त कर दिया जाये और उपभोक्ता विभाग को फ्री बिजली दे जिसके विरोध में उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कडा प्रतिवाद करते हुए कहा कि पावर कारपोरेशन खुद बिजली का पैसा लेगा और उसपर सरकार से रूपया 1.5 प्रति यूनिट का आरपीओ और यदि रूट टाप सोलर पावर लगाने वाले घरेलू व अन्य उपभोक्ता कुछ अतिरिक्त बिजली विभाग को देंगे तो वह फ्री में क्यों? यह व्यवस्था पूरी तरह अनुचित है। कारपोरेशन की यह मांग असंवैधानिक है।
सार्वजनिक सुनवाई में उपभोक्ता परिषद ने आगे अपनी बात रखते हुए कहा कि वर्तमान में जब पूरे देश में सोलर पावर हाउस बडे पैमाने पर लग रहे हैं ऐसे में अब सोलर को प्रमोट करने की कोई अति आवश्यकता प्रतीत नही होती ऐसे में रेग्यूलेशन में 2 मेगावाट तक का प्रस्ताव उचित नही है। इसको केवल 1 मेगावाट तक ही रखा जाये। देश के ज्यादातर राज्यों में यही व्यवस्था है। किसान/ग्रामीण/ घरेलू उपभोक्ताओं को छोडकर सभी उपभोक्ता जो सोलर प्लाण्ट लगाते हैं उनकी बिलिंग नेट मीटरिंग पर न करके ग्रास बिलिंग के आधार पर ही की जाये। ग्रास बिलिंग में यह व्यवस्था की जाये कि आयोग द्वारा टैरिफ में तय मेरिट आर्डर की न्यूनतम दर ही सोलर पावर प्लाण्ट की उत्पादन लागत मानी जायेगी। पूर्व में बने रेग्यूलेशन में किसान, ग्रामीण घरेलू को छोडकर सभी वह उपभोक्ता या निजी घराने जो सोलर पावर प्लाण्ट लगाये हैं उनकी बिलिंग अनिवार्य रूप से नेट मीटरिंग से हटाकर ग्रास बिलिंग पर अविलम्ब परिवर्तित करने का प्राविधान कराया जाये।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने आयोग के सामने यह भी गंभीर मुददा उठाया कि बडे पैमाने पर जो घरेलू विद्युत उपभोक्ता सोलर रूट टाप अपने घरों पर लगाये हैं उन्हें विभाग पहले एनओसी देने में परेशान करता है और फिर बिलिंग में अनेकों कठिनायी उठानी पडती है क्योंकि आज भी सिस्टम पर सही बिलिंग व्यवस्था न होने के चलते उपभोक्ता को मैनुवल बिल निर्गत किया जा रहा है। जिससे विद्युत उपभोक्ता जो सोलर रूट टाप लगाये हैं वह आये दिन विभाग के चक्कर लगाते हैं और परेशान हो रहे हैं।







