व्यंग्य /नवेद शिकोह
लखनऊ, 01 दिसम्बर 2018: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और भाजपा के फायर ब्रांड नेता आदित्यनाथ योगी ने राजनीतिक मंचों पर एक सप्ताह में दो चर्चित और विवादित बयान दिये। इन बयानों की चर्चा धूम मचाये है। इन दोनों बयानों का राजनीतिक महत्व और एक ही अर्थ है। इस बात को कोई समझ ही नहीं पा रहा है।
बयान नंबर एक- बजरंगबली हमारे यानी भाजपा के हैं। कांग्रेस को अपने अली मुबारक हों।
बयान नंबर दो- बजरंगबली दलित थे।
दोनो का कामन अर्थ- दलित बजरंगबली और अली दोनों अलग-अलग हैं। दोनो को एक करने की कोशिश ना की जाये।
पिछले दिनों यूपी के उप चुनाव में भाजपा विरोधी गठबंधन का सैंपल पेश हुआ था। जिसमें मुख्यमंत्री योगी को दोहरा झटका दिया था। पहला ये कि गोरखपुर में उनकी ही लोकसभा सीट पर सपा-बसपा गठबंधन ने कब्जा कर लिया था। दूसरा ये खतरा पैदा कर दिया था कि आगामी लोकसभा चुनाव में भाजपा के लिए यूपी ही सबसे बड़ी चुनौती है।

मुख्यमंत्री योगी को ये बात सता रही होगी कि यदि ये गठबंधन दलित-पिछड़ों और मुस्लिमों को एकजुट कर ले गया तो लोकसभा चुनाव में भाजपा की वापसी बहुत ही कठिन हो जायेगी। इस गठबंधन का केंद्र यूपी होगा। और फिर भाजपा की शिकस्त का ठीकरा उनपर ही फूटेगा। क्योंकि वो यूपी के मुखिया है।
योगी जी को ये बात कुछ ज्यादा ही सता रही होगी कि
भाजपा विरोधी गठबंधन यूपी में सबसे ज्यादा प्रभावशाली हो सकता है। दलित-पिछड़े और मुसलमानों का वोटबैंक यदि गठबंधन की झोली में आ गला तो ये मोदी लहर को भी सुनामी बनकर धराशायी कर देगा।
मुख्यमंत्री योगी इस गठबंधन के इस समीकरण को ही असफल बनाना चाहते होंगे। जिसके लिये उन्होंने अलग-अलग बयानों में एक बात कह दी-
अली (मुसलमान) कांग्रेस को मुबारक। बजरंगबली (दलित) हमारे यानी भाजपा के हैं।







