आयेाग शीघ्र उठायेगा इस गंभीर मामले पर उचित कदम
लखनऊ, 31 दिसम्बर 2018: ग्रामीण अनमीटर्ड विद्युत उपभोक्ताओं के मीटर्ड में शिफ्ट होने पर उन्हें बिजली कम्पनियों द्वारा 10 प्रतिशत की छूट न दिये जाने के मामले में नया मोड आ गया है। बता दें की इस मामलें उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने नियामक आयोग चेयरमैन श्री राज प्रताप सिंह व सदस्यगण से मिलकर उन्हें एक जनहित प्रत्यावेदन सौंपा है।
उप्र विद्युत नियामक आयोग द्वारा वर्ष 2015-16, वर्ष 2016-17 व वित्तीय वर्ष 2017-18 के अन्त तक प्रदेश के सभी ग्रामीण अनमीटर्ड विद्युत उपभोक्ताओं जो मीटर्ड में शिफ्ट होंगे उन्हें बिजली बिल में 10 प्रतिशत छूट का प्राविधान किया था जिसका बिजली कम्पनियों द्वारा लागू न किये जाने के विरोध में आज उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने उप्र विद्युत नियमाक आयेाग के चेयरमैन श्री राज प्रताप सिंह, सदस्यगण श्री एस के अग्रवाल व श्री कौशल किशोर शर्मा से आयोग में मुलाकात कर एक जनहित प्रत्यावेदन सौंपा।
उपभोक्ता परिषद द्वारा आयोग के चेयरमैन को यह अवगत कराया गया कि आयोग द्वारा जारी आदेश के बाद भी लाखों ग्रामीण विद्युत उपभोक्ताओं केा मिलने वाला 10 प्रतिशत की छूट नही दी गयी जिससे बिजली कम्पनियों ने करोडों रूपया हडपने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि एक तरफ बिजली कम्पनियाॅं यह आरोप लगाती हैं कि ग्रामीण विद्युत उपभोक्ता मीटर नही लगवाता और जब आयोग द्वारा मीटर लगाने पर उसको छूट दिये जाने का प्राविधान किया गया तो बिजली कम्पनियाॅं ग्रामीण उपभोक्ताओं को लाभ नही दिया। गौरतलब है कि प्रदेश का सभी उपभोक्ता जब बिजली का कनेक्शन लेता है उससे बिजली मीटर का मूल्य भी वसूल लिया जाता है। इसके बावजूद जब उसे छूट देने की बात आती है तो बिजली कम्पनियाॅं चुप हो जाती हैं।
नियामक आयोग अध्यक्ष श्री राज प्रताप सिंह व सदस्यगणों ने उपभेाक्ता परिषद अध्यक्ष को यह आश्वासन दिया कि आयोग द्वारा तय टैरिफ के अनुसार सभी उपभोक्ताओं को जो लाभ मिलना चाहिये वह मिलेगा। आयोग इस गंभीर मामले पर समय रहते उचित निर्णय लेगा।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने आयेाग अध्यक्ष को यह भी अवगत कराया कि जब भी कभी विद्युत उपभोक्ताओं को कोई लाभ देने की बात आती है तो पावर कारपोरेशन के बिलिंग साफटवेयर में प्राविधान करना क्यों बिजली अभियन्ता भूल जाते हैं? और जब उपभोक्ताओं पर भार डालने की बात आती है तो वह तुरन्त उन पर भार डाल देते हैं। बिजली कम्पनी द्वारा टैरिफ काम देखने के लिए ही करोडों रूपये का कन्सल्टेन्ट रखा गया है। पूरे बिजली विभाग की बात करें तो 100 करोड से ज्यादा के कन्सल्टेन्ट रखे गये हैं फिर भी उपभोक्ताओं को लाभ देने के मामले में सभी की चुप्पी जाॅंच का विषय है।







