- विद्युत अमेण्डमेन्ट बिल 2018 के प्रस्तावित संशोधन का करेंगे विरोध में 8 व 9 जनवरी को कार्य बहिष्कार पर रहेंगे अथवा नहीं इसका निर्णय 6 जनवरी को प्रान्तीय कार्यसमिति की बैठक में होगा
- एसोसिएशन के पदाधिकारी देश के दूसरे राज्यों के आरक्षण समर्थक बिजली विभाग के नेताओं के सम्पर्क में समय पर होगा निर्णय
लखनऊ, 02 जनवरी 2019: उप्र पावर आफिसर्स एसोसिएशन की प्रान्तीय कार्य समिति की आज एक बैठक एसोसिएशन कार्यालय में सम्पन्न हुई जिसमें विद्युत अधिनियम 2003 में प्रस्तावित इलेक्ट्रिसिटी अमेण्डमेन्ट बिल 2018 के संशोधनों पर विचार विमर्श किया गया और सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि कुछ संगठनों द्वारा 8 व 9 जनवरी को प्रस्तावित कार्य बहिष्कार पर एसोसिएशन की प्रान्तीय कार्यसमिति की 6 जनवरी को पुनः एक आवश्यक बैठक बुलाई गई है, जिसमें कार्य बहिष्कार पर रहने अथवा न रहने का निर्णय लिया जायेगा।
वहीं एसोसिएशन ने फिर एक बार केन्द्र सरकार से अपनी मांग दोहरायी है कि विद्युत अमेण्डमेन्ट बिल 2018 के उन संशोधनों को अविलम्ब शिथिल किया जायेगा जो निजीकरण को बढ़ावा दे रहे हैं।
उप्र पावर आफिसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष केबी राम, कार्यवाहक अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा, अति. महासचिव अनिल कुमार, सचिव आरपी केन, लेसा अध्यक्ष अजय कुमार ने कहा कि विद्युत अधिनियम 2003 में प्रस्तावित सभी उन संशोधनों का प्रदेश के दलित अभियन्ता सदा विरोध करेंगे जो निजीकरण को बढ़ावा दे रहा है।
एसोसिएशन लगातार केन्द्र व उप्र सरकार से मांग करती रही है कि निजीकरण न तो बिजली कम्पनी के हित में है और न ही प्रदेश के उपभोक्ताओं के हित में है। एसोसिएशन के पदाधिकारी देश के अन्य राज्यों के आरक्षण समर्थक अभियन्ताओं के सम्पर्क में है, जल्द ही यह निर्णय ले लिया जायेगा कि विद्युत अधिनियम 2003 के प्रस्तावित संशोधन का किस प्रकार से विरोध किया जायेगा।
एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कहा प्रदेश के सभी दलित अभियन्ताओं को 6 जनवरी को रेड एलर्ट जारी किया जायेगा कि उन्हें अगली रणनीति के तहत क्या करना है?







