बिजली कम्पनियों में किसी भी उपभोक्ता के साथ यदि अब हुआ अनावश्यक उत्पीड़न तो दोषी कार्मिकों/अभियंताओं के खिलाफ उठाया जायेगा कठोर कदम
लखनऊ, 15 फरवरी 2019: सरचार्ज समाधान योजना के रजिस्ट्रेशन की अन्तिम तारीख 31 मार्च तक आगे बढ़ाये जाने सहित बिजली कम्पनियों में अनेकों उन मामलों जिन पर कानून बनने के बाद भी उपभोक्ताओं का लगातार उत्पीड़न किया जा रहा है, को लेकर उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष ने आज प्रदेश के ऊर्जा मंत्री से शक्ति भवन उनके कार्यालय में मुलाकात कर एक ज्ञापन सौंपा और सभी मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। उपभोक्ता परिषद द्वारा ऊर्जा मंत्री के सामने मुद्दा उठाया गया कि पूरे उप्र में अनेकों मामलों में उप्र विद्युत नियामक आयोग द्वारा कानून एवं आदेश जारी किये जाने के बाद भी विभिन्न मामलों चाहे वह नये कनेक्शन का मामला हो, विद्युत भार का मामला हो, विधा चेन्ज का मामला हो, उपभोक्ता द्वारा अपने परिसर के आंशिक भाग में निर्माण का मामला हो, ग्रामीण फीडर पर अधिक बिजली के नाम पर शहरी दर लागू करने का मामला हो या फिर ग्रामीण उपभोक्ताओं द्वारा मीटर लगाने पर उन्हें टैरिफ अनुसार 10 प्रतिशत छूट का मामला हो, के मुद्दे पर बिजली कम्पनियों में लगातार उपभोक्ताओं का उत्पीड़न किया जा रहा है, जिससे सरकार की छवि धूमिल होना स्वाभाविक है।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने ऊर्जा मंत्री के सामने किसानों की समस्याओं को अवगत कराते हुए कहा कि सरचार्ज समाधान योजना जिसका रजिस्ट्रेशन कराने की आज अन्तिम तारीख है। बड़े पैमाने पर अभी भी उपभोक्ता/किसान समाधान योजना का लाभ लेने से वंचित रह गये हैं, ऐसा इसलिये है क्योंकि रजिस्ट्रेशन के समय ही 30 प्रतिशत बकाया उपभोक्ता को जमा करना है। किसानों का उत्पाद सरसों, आलू, गन्ना इत्यादि जो अब तैयार हो रहा है, उसको किसान बेचकर इस योजना का लाभ लेना चाहता है। इसलिये रजिस्ट्रेशन कराने की अन्तिम तारीख को 31 मार्च तक बढ़ा दिया जाये।
ऊर्जा मंत्री श्री श्रीकान्त शर्मा ने उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष को यह आश्वासन दिया कि सरचार्ज समाधान योजना के रजिस्ट्रेशन की अन्तिम तिथि को बढ़ाने के मामले में सरकार विचार कर रही है, जल्द ही उपभोक्ताओं को खुशखबरी मिलेगी। जहां तक सवाल है विद्युत नियामक आयोग द्वारा बनाये गये अनेकों कानूनों का बिजली कम्पनियों के अधिकारियों/कार्मिकों द्वारा उल्लंघन किये जाने का उस पर सरकार गम्भीर है। आज ही बिजली प्रबन्धन को निर्देश दिये जा रहे हैं। किसी भी उपभोक्ता का अब किसी भी कार्मिक /अभियन्ता द्वारा अनावश्यक उत्पीड़न किया गया तो उनके विरूद्ध कठोर कार्यवाही की जायेगी। सरकार के लिये उपभोक्ता हित और नियमों को लागू कराना सर्वोपरि है।







