आयोग ने कहा : उपभोक्ता उत्पीड़न करने वालों के खिलाफ आयोग उठायेगा जल्द ही उचित कदम
लखनऊ, 18 फरवरी 2019: लखनऊ के राजाजीपुरम में अपने परिसर में निर्माण करा रहे उपभोक्ता का मामला अब नियामक आयोग पहुंच गया है जहां दोषियों के कार्यवाही तय खिलाफ मानी जा रही है। बता दें कि पूरे प्रदेश से बड़े पैमाने पर यह शिकायतें आ रही हैं कि मीटर्ड उपभोक्ता अपने परिसर पर जब मकान का विस्तार अपने भार की परिधि में करा रहा होता है तो उसे परेशान करने के लिये या तो बिजली चोरी में फंसाया जाता है या तो उस पर असेसमेंट कर दिया जाता है।
ठीक इसी प्रकार का एक मामला राजधानी लखनऊ के राजाजीपुरम में सामने आया जहां एक उपभोक्ता को गलत तरीके से फंसाया गया। इस प्रकार के पूरे प्रकरण को लेकर उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व विश्व ऊर्जा कौंसिल के स्थायी सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने आज विद्युत नियामक आयोग के चेयरमैन श्री राज प्रताप सिंह से मुलाकात कर मध्यांचल विद्युत वितरण निगम द्वारा विगत दिनों राजधानी लखनऊ के राजाजी पुरम में एक विद्युत उपभोक्ता बृजेश मिश्रा को गलत तरीके से फंसाये जाने और पुनः ऊर्जा मंत्री के निर्देश के बाद भी चेकिंग टीम द्वारा लीपापोती किये जाने को लेकर विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 142 के तहत अवमानना वाद दायर किया और आयोग से यह अनुरोध किया कि यह एक उदाहरण स्वरूप है।
उन्होंने कहा कि इस प्रकार की घटनाएं पूरे प्रदेश में हर दिन हो रही हैं और उपभोक्ताओं का उत्पीड़न चरम पर है। इसलिये आयोग अविलम्ब कठोर कदम उठाये।
नियामक आयोग के चेयरमैन ने उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष को आश्वासन दिया कि उपभोक्ताओं के हित की रक्षा करने के लिये आयोग हमेशा तत्पर है किसी भी उपभोक्ता के साथ उत्पीड़न गम्भीर मामला है आयोग इस पर जल्द उचित कदम उठायेगा।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने मध्यांचल विद्युत वितरण कम्पनी की चेकिंग टीम का पर्दाफाश करते हुए कहा कि उत्पीड़न की हद तो तब हो गयी जब मुख्य अभियन्ता स्तर के अधिकारी टैरिफ की धारा-14 की गलत व्याख्या कर इस बात में उपभोक्ता को उलझा रहे थे कि उसके परिसर पर 90 प्रतिशत निर्माण कार्य चल रहा है जबकि आयोग द्वारा बनाये गये कानून में पूरी तरीके से स्पष्ट है कि मीटर्ड विद्युत उपभोक्ता अपने भार की परिधि में कितना भी विस्तार अपने परिसर पर करा सकता है। फिर गलत व्याख्या क्यों की गयी?
उन्होंने कहा कि सबसे बड़ा चौकाने वाला मामला तो तब सामने आया जब ऊर्जा मंत्री के निर्देश के बाद भी मध्यांचल की टीम ने उपभोक्ता के परिसर की गलत रिर्पोट लगा दी, जबकि केस पूरी तरीके से स्पष्ट है कि उपभोक्ता के परिसर पर ऊपर नीचे मिलाकर 2 कमरे पुराने मौजूद हैं आगे वह कितना भी निर्माण कार्य अपने भार की परिधि में कराये वह उसकी मर्जी। उस पर टिप्पणी करने का अधिकार किसी को नहीं।







