आतंकी हमलों से बने युद्ध के हालात के बीच भारत के विमानों द्वारा पाकिस्तान की सीमा में घुसकर आतंकवादी ठिकानों को नष्ट करना आतंकवादी हमलों के खिलाफ आज तक की सबसे बड़ी कार्रवाई है। पुलवामा आतंकवादी हमले को भारत यों ही नहीं जाने देगा, यह तो साफ था लेकिन इस तरह पाकिस्तान सहित दुनिया को भौंचक्क करने वाली कार्रवाई होगी यह अनुमान किसी ने शायद ही लगाया हो।
लेकिन भारत की इस ऐतिहासिक कार्रवाई से बौखलाया पकिस्तान आज भी शांति की पहल की आड़ में किसी न किसी भी सूरत में भारत से बदला लेने को बेताब हैं। अभी दो दिन पहले ही उसने भारतीय वायु सीमा में घुसने की नापाक कोशिश की। लेकिन वह हाई सिक्योरिटी अलर्ट के चलते नाकाम रहा। इधर भारत ने भी साफ़ कह दिया हैं की जब तक जैश का तहस-नहस नहीं करेगा तब तक भारत चुप नहीं बैठेगा। इसके लिए चीन चाहे मसूद अज़हर को बचाने के लिए वीटो पावर का इस्तेमाल क्यों न कर ले लेकिन भारत के इरादे पक्के हैं।

इस बार सितम्बर 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक की तरह भारत पाक अधिकृत तक सीमित नहीं रहा। खैबर पख्तूनख्वा स्थित जैश के महत्त्वपूर्ण केंद्र बालाकोट को भी नष्ट किया गया है। वायुसेना ने जिस तरह चिह्नित ठिकानों को बिना पाकिस्तान के आम नागरिकों को नुकसान पहुंचाए नष्ट किया है, उससे भारत की क्षमता और विश्वसनीयता दुनिया में बढ़ी है। भारत ने सीधा संदेश दिया है कि हम आतंकवाद के सीमा पार स्रेत को खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध हैं, पर हमारा निशाना न पाकिस्तान है और न ही पाकिस्तानी अवाम। इसलिए विमान तीन महत्त्वपूर्ण ठिकानों पर कुछ मिनटों के अंदर बमों से नष्ट कर वापस आ गए।
लेजर गाइडेड बमों का इस्तेमाल किया गया ताकि रात में वे अपने लक्ष्य को देखकर उन्हीं तक सीमित रहें। हमारी कार्रवाइयों के जवाब में पाकिस्तान क्या करेगा अगर यह विचार करते रहें तो फिर आतंकवाद के विरुद्ध युद्ध में हम कभी विजयी नहीं हो सकते। पाकिस्तान न भूले कि भारत ने पुलवामा हमले सहित पठानकोट जैसे अन्य हमलों के दोषी जैश के खिलाफ कार्रवाइयां की है। अगर वह अपनी ओर से भारत केंद्रित आतंकवादी संगठनों पर कार्रवाई करता तो ऐसी नौबत ही नहीं आती।
इसलिए वह भारत के खिलाफ किसी जवाबी कार्रवाई करने का आत्मघाती जोखिम उठाने की जगह इस पर विचार करे कि इन आतंकवादियों को पाल-पोसकर उसने क्या पाया है? भारत ने आतंकवाद के विरुद्ध आत्मरक्षा के तहत यह कदम उठाया है और आगे भी उठाएगा।
अगर पाकिस्तान आगे बढ़कर आतंकवादी ठिकानों को नष्ट करे, आतंकवादियों को सुरक्षा कार्रवाई में खत्म करना शुरू करे और उनके आकाओं को कानून के अंदर सजा दिलवाए तो भारत को कार्रवाई करने की जरूरत ही नहीं रहेगी। इसमें पाकिस्तान चाहेगा तो भारत उसकी मदद भी करेगा और दुनिया के प्रमुख देश भी सहयोग को आगे आएंगे। भारत ने तय कर लिया है और जिस दिशा में बढ़ा है, उससे पीछे नहीं लौटेगा। यह साफ है।







