बंद का दिखा मिला जुला असर, हर तरफ रही चौकसी
लखनऊ, 05 मार्च 2019: भारत बंद को लेकर आज फिर मोदी सरकार कटघरे में खड़ी की गयी। इस बार यह भारत बंद जातीय जनगणना कराने के बाद आबादी के अनुसार आरक्षण लागू करने समेत कई मुद्दों को लेकर किया गया। प्रदर्शनकारी 13 प्वाइंट रोस्टर की जगह (पुरानी रोस्टर प्रणाली) 200 प्वाइंट रोस्टर लागू करने की मांग को लेकर जबरदस्त प्रदर्शन कर रहे थे।

सामाजिक संगठनों ने भारत बंद के दौरान आज कई राजनितिक संगठनों को भी ‘भारत बंद’ के लिए आमंत्रित किया। दलित संगठनों के अलावा आदिवासियों ने भी उन्हें जंगल से बेदखल करने खिलाफ भी बंद बुलाने का आह्वान किया था।

इस बीच बीबीएयू के छात्र संघटन एयूडीसू ने भी भारत बंद का समर्थन करते हुए कहा कि भारत बंद अगर भारत के विश्वविद्यालयों/महाविद्यालयों में बहुजन समाज के लोगों के लिए दरवाजे बन्द होंगे तो हम भी उन विश्वविद्यालयों/महाविद्यालयों को नहीं चलने देंगे। और सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करेंगे।
अखिलेश यादव और अजित जोगी ने भी किया समर्थन:
समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा सरकार द्वारा शिक्षण संस्थानों में लागू आरक्षण विरोधी 13 प्वाइंट रोस्टर प्रणाली के सख़्त विरोध में हैं।
भारतबन्द में जन अधिकार छात्र परिषद ने करवाया पाटलिपुत्र विवि बंद
पटना, 05 मार्च 2019: 13 प्वाइंट रोस्टर के खिलाफ पूरा भारत बंद रहा। जन अधिकार पार्टी (लो) के संरक्षक पप्पू यादव के निर्देशानुसार आज जन अधिकार छात्र परिषद की बिहार इकाई को इस भारत बंद में अपना नैतिक समर्थन देने का ऐलान किया था। जिसके तहत आज जन अधिकार छात्र परिषद के वरीय प्रदेश उपाध्यक्ष विकाश बॉक्सर के नेतृत्व में जन अधिकार छात्र परिषद के सभी साथीयों के साथ राजेन्द्र नगर सड़क स्थित पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय शाखा कार्यालय से धरना प्रदर्शन कर वाईपास सड़क को जाम किया। विकाश ने कहा कि 13 प्वाइंट रोस्टर सीधे तौर पर धाधली करने का काम कर रही है, इसके तहत खुल्लम खुल्ला आरक्षण को खत्म किया जा रहा है। 13 प्वाइंट रोस्टर उनसभी रिजर्वेशन कैटेगरी बालों युवाओं के लिए नुकसान है ।

13 प्वाइंट रोस्टर की वजह से रिजर्व कैटेगरी की सीटें कम हो रही है इस 13 पॉइंट रोस्टर को लेकर हम सभी छात्र युवा एवं एसटी एससी और ओबीसी वर्ग सरकार से यही मांग करते हैं कि सरकार इसमें हस्तक्षेप कर इसमें बदलाव लाए एवं 200 प्वाइंट रोस्टर सिस्टम से ही नियुक्तियां होनी चाहिए। जैसे कि अब तक होता आया है ।







