दिलीप अग्निहोत्री
संवाद के लिए शब्दों की आवश्यकता होती है। लेकिन यह एकमात्र माध्यम नहीं है। अक्सर मौन रहकर भी बड़े सन्देश दिए जा सकते है। अथवा वह मौन भी लोगों को प्रभावित करने वाला हो सकता है। भारत में प्राचीन काल में ही मौन की महिमा का प्रतिपादन हो चुका था। अनगिनत ऋषियों ने अपनी दिनचर्या में मौन को सम्मिलित किया था। व्रत या उपवास केवल आहार से संबंधित नहीं होता। मौन रहना भी व्रत की श्रेणी में है। इससे संयम की साधना होती है। मौन व्रत की भी दो श्रेणियां है। एक में निश्चित अवधि तक पूर्ण व्रत रखा जाता है। दूसरे में तभी बोला जाता है जब ऐसा करना अपरिहार्य हो जाये।एक विद्वान ने कहा कि तभी बोलो जब मौन से अच्छा कुछ बोलने को हो। वर्तमान समय में चुनाव आयोग के निर्णय से यह प्रसंग एक बार पुनः चर्चा में आया। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चुनाव आयोग के प्रतिबंध को इस अंदाज में निभाया की उस पर लोगों का ध्यान आकर्षित होना ही था। चुनाव आयोग ने कई नेताओं को बहत्तर घण्टे तक भाषण न देने का प्रतिबंध लगाया था। इनमें योगी आदित्यनाथ भी शामिल थे।
उन्होंने चुनाव आयोग के प्रतिबंध को बखूबी निभाया। इसके लिए उन्होंने अपनी संत परम्परा का पालन किया। वह मौन भी रहे, कुछ लोगों से तभी बोले जब ऐसा करना अपरिहार्य था। चुनाव आयोग का आदेश मिलने के बाद वह हनुमान जी के मंदिर गए। चुनाव आयोग को भेजे गए अपने स्पष्टीकरण में बताया कि बजरंगबली जी के प्रति उनकी सम्पूर्ण आस्था है। कोई भी कार्य शुरू करने से पहले वह अपने आराध्य का स्मरण करते है। वैसे जब कुछ नेताओं ने खुले आम वर्ग विशेष से वोट देने का आह्वान किया तभी योगी ने भी जबाब दिया। उनका कहना था कि वर्ग विशेष के वोट मांगने के बाद जितने वोट बचे है, वह हमको दे दीजिए। फिर भी चुनाव आयोग का निर्णय अपनी जगह ठीक है। उसका सम्मान होना चाहिए। योगी आदित्यनाथ ने ऐसा ही किया।

लखनऊ में संकटमोचन मंदिर में वह दर्शन करने हेतु गए, स्पर्श बालिका विद्यालय जाकर दृष्टिबाधित बालिकाओं से मुलाकात की। उसके बाद वह अयोध्या यात्रा पर गए। वह सवा चार घंटे अयोध्या में रहे। दलित राजगीर महावीर के यहां भोजन किया। यह सुंदर सन्योग था कि राजगीर महावीर को प्रधानमंत्री आवास योजना से आवास मिला है। योगी इसी आवास में गए थे। अशर्फीभवन पीठाधीश्वर जगद्गुरु श्रीधराचार्य से भेंट के बाद मुख्यमंत्री मणिरामदासजी की छावनी पहुंचे। यहां रामजन्मभूमि अध्यक्ष महंत नृत्यगोपालदास से मुलाकात की।
छावनी के उत्तराधिकारी महंत कमलनयनदास, रामवल्लभाकुंज के राजकुमारदास, नाका हनुमानगढ़ी के महंत रामदास, निर्वाणी अखाड़ा के श्रीमहंत धर्मदास, दिगंबर अखाड़ा के महंत सुरेशदास, तिवारी मंदिर के महंत गिरीशपति त्रिपाठी, संत समिति के अध्यक्ष महंत कन्हैयादास, मानसभवन के महंत अर्जुनदास आदि संत-महंत उपस्थित थे।
इसके बाद योगी आदित्यनाथ दिगंबर अखाड़ा पहुंचे। वह सुग्रीवकिला और हनुमानगढ़ी भी गए। यहां उनके साथ कई शीर्ष संतों सहित राममंदिर निर्माण के लिए अभियान चलाने वाले बब्लू खान एवं कई अन्य मुस्लिमों ने हनुमानचालीसा का पाठ किया। योगी आदित्यनाथ ने रामलला के दर्शन और सरयू का पूजन भी किया। योगी आदित्यनाथ शक्तिपीठ देवी पाटन मंदिर में भी पूजा अर्चना के लिए गए।
इस प्रकार योगी आदित्यनाथ ने चुनाव आयोग के आदेश का पालन किया। इसी के साथ उन्होंने बिना कुछ कहे अपनी आस्था का सन्देश भी दिया है।






2 Comments
very good put up, incredibly educational. I’m pondering the reason why another advisors of that industry are not aware this specific.
You will need to proceed your personal producing. I know, you’ve a substantial readers’ starting point presently!
Fantastic web pages. Numerous invaluable information and facts right here.
I¡¦m distributing doing it to a couple of acquaintances ans on top of that revealing for
delightful. And, many thanks upon your endeavor!