डॉ दिलीप अग्निहोत्री
कुछ समय पहले उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक की पुस्तक चरैवेति चरैवेति के सिंधी संस्करण हलंदा हलो का लोकार्पण मुंबई राजभवन में महाराष्ट्र के राज्यपाल विद्यासागर राव द्वारा किया गया। लोकार्पण समारोह में महाराष्ट्र के उच्च शिक्षा मंत्री श्विनोद तावड़े एवं भारतीय जनता पार्टी मुंबई के अध्यक्ष एवं विधायक आशिष शेलार, भारतीय सिन्धू सभा के अध्यक्ष लक्ष्मणदास चंदीरामानी, बांद्रा हिन्दू एसोसिएश्यान के अध्यक्ष डाॅ अजीत मन्याल, सिंधी अनुवादक सुखराम दास सहित स्वयंसेवी संस्था स्पंदन आर्ट्स के पदाधिकारीगण एवं अन्य विशिष्टजन उपस्थित थे।महाराष्ट्र के राज्यपाल श्री सी विद्यासागर राव ने लोकार्पण समारोह में विचार व्यक्त करते हुये कहा कि राम नाईक की पुस्तक समाज सेवा एवं राजनीति में कार्य करने वालों के लिये गीता के समान है जिसका बार-बार अध्ययन करना चाहिए। राम नाईक ने राजनीति को समाज सेवा का माध्यम बनाकर गरीब, जरूरतमंद, कुष्ठ पीड़ितों एवं महिलाओं के लिये बहुत कार्य किया है। उन्होंने अपने जीवन में सदैव सामाजिक मुद्दों की राजनीति की है। वह मुंबई राजभवन में प्रतिनिधिमण्डल के साथ राज्यपाल से मुलाकात कर जनसमस्याओं के बारे में अवगत कराते रहे है और उनके समाधान का सुझाव भी देते हैं। उन्होंने कहा कि राम नाईक की सामाजिक मुद्दों से जुड़ी राजनीति के कारण
उन्नीस सौ छियासी में महाराष्ट्र के राज्यपाल कोना प्रभाकर राव को त्याग पत्र तक देना पड़ा था। राम नाईक ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुये कहा कि वह मुंबई से हैं और आज उनकी पुस्तक के सिंधी संस्करण का लोकार्पण मुंबई राजभवन में हो रहा है। उनके सामाजिक एवं राजनैतिक जीवन में सिंधी भाषिक महानुभावों का बहुत प्रभाव रहा है। सिंधी लोग सदैव उनके लिये प्रकाश पुंज के समान रहे हैं। जनसंघ के मुंबई अध्यक्ष झमटमल वाध्वानी से एवं विधायक रहते हुये नेता विधायक दल हशु आडवाणी से उन्होंने राजनीति के क्षेत्र में बहुत सीखा है। उन्नीस सौ नवासी से सांसद रहे तो अटल जी एवं आडवाणी जी का सानिध्य प्राप्त हुआ। उनकी पुस्तक का सिंधी में प्रकाशन का कार्यक्रम उन्हें बहुत समाधान देने वाला अवसर है।
अपने राजनैतिक जीवन के अनुभवों को साझा करते हुए उन्होंने बताया कि वे तीन बार विधायक एवं पांच बार सांसद रहे हैं। उन्होंने विपक्ष में रहते हुये उन्नीस सौ बनावे में संसद में राष्ट्रगान गायन की शुरूआत करायी। उनके प्रयास से उन्नीस सौ तिरानवे में सांसद निधि की शुरूआत हुई। उन्नीस सौ चौरानवे में मुंबई को उसका असली नाम दिलवाया जिसके बाद कई स्थानों के नाम परिवर्तित हुये। वर्तमान में उत्तर प्रदेश के प्रयागराज और अयोध्या भी उसी बदलाव की कड़ी हैं। अटल जी की सरकार में पेट्रोलियम मंत्री रहते हुये उनके सुझाव पर चार सौ उनतालीस शहीदों के परिजनों को परिवार के पालन पोषण के लिये सरकारी खर्च पर पेट्रोल पम्प और गैस एजेन्सी दी गयी। मेरे प्रेरणा पुरूष पिता, सहयोगी एवं कार्यकर्ता रहे हैं तथा पुस्तक लिखने में उनकी पत्नी, बेटियों और शुभचिंतकों से उन्हें संबल मिला।
निरन्तर कर्म करते रहने से ही जीवन में सफलता प्राप्त होती है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने राज्यपाल नाईक से भेंट तथा उन्हें पुस्तक चरैवेति चरैवेति के सिंधी संस्करण हेतु बधाई भी दी। राम नाईक ने उन्हें पुस्तक की प्रति भेंट की। मराठी भाषी संस्मरण संग्रह चरैवेति चरैवेति का विमोचन महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस द्वारा पच्चीस अप्रैल दो हजार सोलह को मुंबई में किया गया था।
राज्यपाल की पुस्तक के हिन्दी, अंग्रेजी, उर्दू तथा गुजराती संस्करणों का लोकार्पण नौ नवम्बर दो हजार सोलह को राष्ट्रपति भवन नई दिल्ली में, ग्यारह नवम्बर दो हजार सोलह को लखनऊ के राजभवन में तथा तेरह नवम्बर दो हजार सोलह को मुंबई में हुआ। छब्बीस मार्च दो हजार अठारह को संस्कृत नगरी काशी में राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद द्वारा ‘चरैवेति चरैवेति के संस्कृत संस्करण का लोकार्पण किया गया। इस वर्ष फरवरी को पुस्तक चरैवेति चरैवेति के सिंधी प्रकाशन का लखनऊ में तथा बाइस फरवरी को अरबी एवं फारसी संस्करण का लोकार्पण नई दिल्ली में हुआ। मूल मराठी पुस्तक चरैवेति चरैवेति अब सिंधी, हिन्दी, गुजराती, संस्कृत, उर्दू, अंग्रेजी, फारसी, अरबी और जर्मन जैसी दस भाषा में उपलब्ध है।






