यह कहा सुप्रीम कोर्ट ने:-
यदि मध्यस्थता करने वाली समिति नतीजों के प्रति आशान्वित है और 15 अगस्त तक का समय चाहती है तो इतना समय देने में क्या नुकसान है? यह मुद्दा वर्षो से लंबित है। हमें इसे समय क्यों नहीं देना चाहिए।
समिति ने सुप्रीम कोर्ट को अपनी प्रथम गोपनीय रिपोर्ट सौंपी
नई दिल्ली, 11 मई 2019: रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद का समाधान खोजने के लिए गठित कलीफुल्ला समिति का कार्यकाल सुप्रीम कोर्ट ने 15 अगस्त तक बढ़ा दिया है। मध्यस्थता समिति के अनुरोध पर संविधान पीठ ने सभी पक्षकारों से बातचीत के लिए समय बढ़ा दिया।
चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस शरद अरविंद बोबडे, जस्टिस धनंजय चंद्रचूड, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस अब्दुल नजीर की पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने कहा कि उसे जस्टिस कलीफुल्ला मध्यस्थता समिति की रिपोर्ट मिली है और उसने अपनी कार्यवाही पूरी करने के लिए 15 अगस्त तक का समय देने का अनुरोध किया है। संविधान पीठ ने संबंधित पक्षों के वकीलों से कहा कि यदि मध्यस्थता करने वाली समिति नतीजों के प्रति आशान्वित है और 15 अगस्त तक का समय चाहती है तो इतना समय देने में क्या नुकसान है। यह मुद्दा वर्षो से लंबित है। हमें इसे समय क्यों नहीं देना चाहिए।

इस मामले में दोनों ही पक्षों के वकीलों ने मध्यस्थता की कार्यवाही के प्रति भरोसा जताया और कहा कि वे इस प्रक्रिया में पूरा सहयोग कर रहे हैं। इससे पहले, सुनवाई शुरू होते ही संविधान पीठ ने कहा कि उसे मध्यस्ता समिति की रिपोर्ट सात मई को मिल गई थी और उसने मध्यस्थता की कार्यवाही पूरी करने के लिए 15 अगस्त तक समय देने पर विचार करने का अनुरोध किया है।
अदालत ने कहा कि हमने जस्टिस कलीफुल्ला की सात मई की रिपोर्ट का अवलोकन किया है और उस पर विचार किया है। रिपोर्ट में मध्यस्थता की कार्यवाही की प्रगति की जानकारी दी गई है। संविधान पीठ ने कहा कि इसका सर्वमान्य समाधान खोजने के लिए समिति को 15 अगस्त तक का समय दिया जा सकता है। इस मामले में पेश एक वकील ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता समिति को आठ सप्ताह का समय दिया था और अब नौ सप्ताह बीच चुके हैं।
इस पर अदालत ने कहा कि हमने आठ सप्ताह का समय दिया था और रिपोर्ट आ गई है। हम समिति की रिपोर्ट के बारे में बताने के इच्छुक नहीं हैं। एक अन्य वकील ने अदालत से कहा कि क्षेत्रीय भाषाओं में दस्तावेजों की संख्या करीब 13 हजार 990 है और कुछ का गलत अनुवाद किया गया है जिससे समस्या होगी। अदालत ने कहा कि अनुवाद के बारे में यदि कोई आपत्ति है तो उसे 30 जून तक लिखित में रिकार्ड पर लाया जाए। अदालत ने कहा कि किसी को भी मध्यस्थता के रास्ते में नहीं आने दिया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने आठ मार्च को जस्टिस एफएमआई कलीफुल्ला की अध्यक्षता में मध्यस्थता समिति गठित की थी। इस समिति के अन्य सदस्यों में आध्यत्मिक गुरु और आर्ट आफ लिविंग के संस्थापक श्रीश्री रविशंकर और वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीराम पंचू शामिल हैं। अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि मध्यस्थता समिति उत्तर प्रदेश के फैजाबाद जिले में अपना काम करेगी और इसके लिए कार्यस्थल, सदस्यों के रहने का बंदोबस्त, सुरक्षा, आने जाने की सुविधा सहित अन्य व्यवस्थाएं राज्य सरकार करेगी ताकि समिति की कार्यवाही सुचारू ढंग से हो सके।







