राकेश कुमार मिश्र
नरेंद्र मोदी के दुबारा प्रधानमंत्री बनने से विपक्ष हताश एवं असमंजस की स्थिति में है। वह यह अब भी नहीं समझ पा रहा है कि इतने दुष्प्रचार एवं गाली गलौज के बाद भी मोदी को सामान्य जनमानस ने हीरो कैसे मान लिया। विपक्ष ने मोदी पर निरन्तर यह आरोप लगाया कि उन्होंने जनता को अच्छे दिन आने के झूठे सब्जबाग दिखाये तथा ठगी करके बहुमत हासिल कर लिया। अब वर्तमान नतीजों के बाद वह कह रहे हैं कि मोदी ने जनता को बरगलाकर तथा राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दे उठाकर जनता का जनादेश पा लिया। उनका यह कहना एक प्रकार से जनता के विवेक एवं जनादेश का अपमान है।वह यह क्यों नहीं समझना चाहते कि सब्जबाग तो विपक्ष ने भी सभी को न्याय, रोजगार, किसानों का उद्धार एवं जीएसटी के सरलीकरण के दिखाये परन्तु जनता ने उस पर भरोसा क्यों नहीं किया। यह स्वीकार करना भी विपक्ष के लिए कठिन होगा कि इसका प्रमुख कारण उनकी वंशवादी, जातिवादी, साम्प्रदायिक तुष्टीकरण तथा भ्रष्टाचार से ओतप्रोत राजनीति है। मोदी पर जनमानस के विश्वास का सबसे बड़ा कारण उनका शुचितापूर्ण राजनैतिक सफर, भाई भतीजावाद से परहेज तथा राष्ट्रहित में कठिन से कठिन निर्णय लेने की क्षमता है जिसके लिए वे दलहित को भी ताक पर रखकर कोई भी जोखिम उठाने में संकोच नहीं करते।

उज्जवला, सबको आवास एवं शौचालय, सभी को विद्युत कनेक्शन तथा आरोग्य जैसी सैकड़ों योजनाओं ने समाज के कमजोर तबके का उन पर विश्वास बढ़ाया तथा इस वंचित तबके को जाति पंथ से हटकर मोदी का मुरीद बना दिया जिसे विपक्ष समझ न सका और शायद अब भी नहीं समझना चाहता।
विपक्ष का यह भी दुष्प्रचार रहा कि मोदी ने देश को रसातल में पहुंचा दिया जबकि सत्यता यह है कि इसी अवधि में भारत विश्व की छठी नंबर की अर्थव्यवस्था बना तथा ईजी इन डूइंग बिजनेस में लम्बी छलाँग लगाई। मंहगाई दर 5 प्रतिशत से भी कम एवं पूर्ण नियन्त्रण में रही। जीएसटी जैसे महत्वपूर्ण सुधार लागू किये गये प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में निरंतर वृद्धि हुई तथा किसानों एवं युवकों के लिए भी अनेक योजनाएं लागू की गयीं। नोटबंदी एवं जीएसटी जैसे कठोर कदमों के बाद भी विकास दर 7 प्रतिशत से ज्यादा ही रही यद्यपि इसमें और वृद्धि अपेक्षित है।
रोजगार एवं विकास दर पर कुछ नकारात्मक असर अवश्य पड़ा परन्तु इन कदमों से अर्थव्यवस्था में पारदशिता बढ़ी, कर संग्रह एवं आयकर रिटर्न भरने वालों की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि हुई। नकली नोटों की आपूर्ति एवं आतंकवादी फंडिग पर भी काफी हद तक अंकुश लगाना सम्भव हो सका। मोदी के कार्यकाल में ही दिवालिया कानून पारित कर लाखों करोड़ रुपये के डूबते ऋणों की वसूली की तथा माल्या, चौकसी जैसे भगोड़ों पर कानूनी कार्रवाई करने में कोई ढील नहीं बरती।
खस्ताहाल सार्वजनिक बैंकों की हालत सुधारने के लिए विलय एवं पुनर्पूजीकरण जैसे कदम उठाये जबकि बैंकों की इस दयनीय दशा के लिए यूपीए-2 कार्यकाल में दिए गए नान मेरिट राजनैतिक दबाव में ऋण ही जिम्मेदार हैं जिनसे बैंकों के एनपीए बहुत बढ़ गए। इस पर भी तोहमत मोदी पर कि उन्होंने पूँजीपतियों से मित्रता निभाई तथा भगोड़ों को मदद की।
मोदी पर लगातार विपक्ष यह आरोप लगाता रहा कि वे अधिनायकवादी हैं तथा उन्होंने संवैधानिक संस्थानों की गरिमा गिराई। यह आरोप वह विपक्ष लगा रहा जिसने सर्वोच्च संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को नीच, चोर, गुंडा,फेंकू, मौत का सौदागर और न जाने क्या क्या कहने में भी संकोच नहीं किया तथा चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था की गरिमा को भी ईवीएम के बहाने तार तार करने में कोई कसर नहीं रखी।
मोदी विरोध में ये मूर्धन्य नेता यह भी भूल गए कि नोटबंदी या सर्जिकल स्ट्राइक जैसे कदम सभी को बताकर नहीं लिए जाते। भ्रष्ट सीबीआई निदेशक या अधिकारी को जबरन अवकाश पर भेजने एवं कार्यवाही करने से तो विपक्ष को सीबीआई की गरिमा गिरती नजर आती है परंतु ममता दीदी द्वारा कोलकाता पुलिस प्रमुख को बचाने हेतु अपनी पुलिस का सीबीआई के काम में दखल और उसी पुलिस प्रमुख के साथ जिस पर घोटाला के सबूत मिटाने की सीबीआई जाँच चल रही हो धरना पर बैठकर विपक्ष को लामबंद करना लोकतंत्र एवं न्यायिक व्यवस्था की गरिमा गिराता नजर नहीं आता।
तूफान से तबाही एवं राहत कार्य का जायजा लेने प. बंगाल गए मोदी के साथ यह कहकर न जाना कि मैं मोदी को प्रधानमंत्री ही नहीं मानती आखिर किस संवैधानिक मर्यादा का अनुसरण है। चुनाव के दौरान एक दल विशेष की राजनैतिक सभा की अनुमति न देना या हेलिकप्टर उतरने की अनुमति न देना कहाँ तक लोकतांत्रिक है। मजेदार यह है कि लोकतन्त्र की हत्या की तोहमत मोदी पर।
सत्यता यह है कि विपक्ष अपनी इस नकारात्मक एवं कालातीत राजनीति के कारण ही आज इस अधोगति को प्राप्त हुआ है और दुखद यह है कि वह आज भी कोई सबक लेने को तैयार नहीं है। जनता का मोदी पर तथा उनकी सर्वसमावेशी नीतियों पर विश्वास बढ़ा है तथा जनता भरोसा करती है कि मोदी अपने अधूरे कार्यों को ईमानदारी से भविष्य में पूरा करेंगे। वर्तमान चुनाव में मोदी को प्राप्त प्रचण्ड बहुमत इस बात का प्रमाण है कि जनता समावेशी विकास से लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा एवं अस्मिता तक देश का भविष्य मोदी के हाथों में ही सुरक्षित समझती है







