डॉ दिलीप अग्निहोत्री
लखनऊ,19 जून 2019: कुलाधिपति के रूप में राज्यपाल राम नाईक ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अनेक सुधार किए है। उनके इन्हीं प्रयासों से उत्तर प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ी है, सत्र न केवल नियमित हुए है, बल्कि विश्वविद्यालयों का कार्य संचालन शैक्षणिक कलेंडर के अनुरूप होने लगा है। लखनऊ में आयोजित शिक्षा में उत्कृष्टता कार्यक्रम में राम नाईक ने इसी संबन्ध में विचार व्यक्त किये। इसके अलावा उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले शिक्षण संस्थान एवं शिक्षाविदों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया।
राज्यपाल ने विचार व्यक्त करते हुये कहा कि उत्तर प्रदेश आबादी की दृष्टि से सबसे बड़ा प्रदेश है। केवल तीन देश चीन, अमेरिका एवं इण्डोनेशिया आबादी की दृष्टि से उत्तर प्रदेश से बड़े हैं। बाइस करोड़ की मानव शक्ति वाले प्रदेश को योग्य शिक्षा देने की आवश्यकता है। सरकार और शिक्षा जगत से जुड़े लोग इस मानव शक्ति पूंजी का देश के लिये सही उपयोग करने हेतु भागीरथ प्रयास करें। उन्होंने कहा कि शिक्षा का बाजारीकरण न हो तथा निर्धनों को शिक्षा प्रदान करने के लिये मानवीय दृष्टिकोण होना चाहिए।
राम नाईक ने राज्य विश्वविद्यालयों की चर्चा करते हुये कहा कि प्रदेश में उच्च शिक्षा पटरी पर आ गयी है। बाइस जुलाई दो हजार चौदह को शपथ ग्रहण कर राज्यपाल के साथ साथ वे राज्य विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति भी बने थे। शैक्षिक सत्र दो हजार चौदह पन्द्रह में दीक्षान्त समारोह दो सौ त्रिपन दिन तथा शैक्षिक सत्र दो हजार पन्द्रह सोलह में एक सौ नौ दिन में सम्पन्न हुये थे। जबकि शैक्षिक सत्र दो हजार उन्नीस बीस में सभी दीक्षान्त समारोह मात्र तिरासी दिन में सम्पन्न हो जायेंगे। पहले केवल चालीस प्रतिशत छात्रायें उच्च शिक्षा प्राप्त कर रही थी जबकि शैक्षिक सत्र दो हजार सोलह सत्रह में इक्यावन प्रतिशत और शैक्षिक सत्र दो हजार अठारह उन्नीस में छात्राओं का प्रतिशत बढ़कर छप्पन प्रतिशत हो गया है। पदक प्राप्त करने में छांछठ प्रतिशत हिस्सेदारी छात्राओं की है। उत्तर प्रदेश के लिये महिला सशक्तीकरण के क्षेत्र में यह एक शुभ संकेत है। उन्होंने कहा कि शैक्षिक गुणवत्ता और शोध को बढ़ाने की आवश्यकता है।
राज्यपाल ने कहा कि गुणवत्तायुक्त शिक्षा के लिये शिक्षकों के रिक्त पद भरना महत्वपूर्ण है जिसके लिये आवश्यक निर्देश दिये जा चुके हैं। नकलविहीन परीक्षा एक चुनौती थी। नकल रोकने के लिये प्रभावी कदम उठाये गये। शैक्षिक सत्र दो हजार सत्रह अठारह में पन्द्रह लाख साठ हजार विद्यार्थियों ने परीक्षा दी। परन्तु नकल रोकने हेतु की गयी सख्ती के कारण शैक्षिक सत्र दो हजार अठारह उन्नीस में बारह लाख विद्यार्थी ही परीक्षा में सम्मिलित हुये। उत्तर प्रदेश में सभी विश्वविद्यालयों के दीक्षान्त समारोह भारतीय परिधान में सम्पन्न हुये। भारत में सौ चयनित विश्वविद्यालयों में प्रदेश का किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय पच्चिसवें स्थान पर है। बत्तीस विश्वविद्यालयों में से और विश्वविद्यालय उत्कृष्टता की श्रृंखला में सम्मिलित हों, के लिये बहुत कुछ करना शेष है। उन्होंने कहा कि वर्ष दो हजार चौदह से दी हजार उन्नीस तक की स्थितियों में सकारात्मक बदलाव आया है।







