- भाजपा ने घोषणा पत्र में कहा 100 यूनिट तक गरीबों को रू0 3 प्रति यूनिट कार्पोरेशन ने कटौती कर सिर्फ 50 यूनिट तक किया सिमित सरकार चुप क्यों?
- आयोग द्वारा बिजली कम्पनियों पर निकाले गये रू0 11,851 करोड़ का लाभ दिलाने के लिये उपभोक्ता परिषद की लड़ाई जारी, सरकार आये आगे और दरों में कराये कमी
लखनऊ,20 जून 2019: प्रस्तावित मंहगी बिजली दरों की मारामारी के बीच आज एक बड़ा खुलासा हुआ। उपभोक्ता परिषद ने पावर कार्पोरेशन प्रबन्धन की मनमाने निर्णय के दावे का खुलासा करते हुए कहा कि जहां भारतीय जनता पार्टी उप्र ने अपने घोषणा पत्र लोक कल्याण संकल्प पत्र 2017 में यह व्यवस्था दी थी कि ’’सभी गरीब घरों को बिजली की पहली 100 यूनिट रू0 3 प्रति यूनिट की रियायती दर पर दी जायेगी, वहीं पावर कार्पोरेशन ने भाजपा के घोषणा पत्र के फैसले को पलटते हुए इसे अपने मनमाने तरीके से बना दिया। कार्पोरेशन प्रबन्धन ने गरीबों की 1 किलो वाट 100 यूनिट को काटकर घरेलू बीपीएल के लिये 1 किलो वाट 50 यूनिट प्रस्तावित कर दिया है जोकि सरकार के फैसले के सीधा खिलाफ है, उपभोक्ता परिषद ने कहा कि यह गरीबों के साथ यह कैसा न्याय है?
बता दें कि जब सरकार बनने के बाद वर्ष 2018-19 में टैरिफ व्यवस्था में 1 किलोवाट 150 यूनिट बीपीएल को इसी आधार पर 1 किलोवाट 100 यूनिट तक रू0 3 का आदेश जारी कराया गया जो वर्तमान में भी लागू है फिर अब प्रबन्धन भाजपा के घोषणा पत्र पर भारी क्यों पड़ रहा है सरकार चुप क्यों है।
उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिष्द के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि पावर कार्पोरेशन प्रबन्धन को क्या यह ज्ञान नहीं कि आज शहर में पानी भी बिना टूल्लू पम्प के नहीं मिलता फिर ऐसे में गरीब 50 यूनिट में अपना गुजारा कैसे करेगा, अभी जो 1 किलोवाट 100 यूनिट पर रू0 350 दे रहा है यदि प्रस्तावित व्यवस्था लागू हो गयी तो 1 किलोवाट 100 यूनिट पर उपभोक्ताओं को लगभग रू0 730 देना पड़ेगा जो 100 प्रतिशत से भी ज्यादा है।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कार्पोरेशन पर तंज कसते हुये कहा शायद कार्पोरेशन को यह लगा होगा कि भाजपा सरकार का कार्यकाल आधा बीत गया इसलिये अब 100 यूनिट की जगह 50 यूनिट उचित है? सबसे बड़ा सवाल यह है कि भाजपा घोषणा पत्र के खिलाफ प्रबन्धन ने इतना बड़ा कदम उठाया फिर भी सरकार चुप है जो अपने आप में बड़ा सवाल है।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा किसी भी हालत में बिजली दरों में बढ़ोत्तरी न होने दी जायेगी चाहे इसके लिये जो भी आन्दोलन करना पड़े, करेंगें और उन्होंने कहा कि अब तो लड़ाई 11,851 करोड़ का लाभ प्रदेश के उपभोक्ताओं की दिलाना ही एक लक्ष्य है।







