Share Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp Post Views: 631 मैं बदनसीबी हूँ। हाँ! मैं गरीबी हूँ।। मैं जंगल में खुश हूँ। पशुओं संग खुश हूँ।। अपनों में खुश हूँ। भूखे पेट खुश हूँ।। बस डर लगता है, इंसानों की बस्ती में। वहाँ मैं निकृष्ट और, सर्वाधिक शोषित हूँ।। – राहुल कुमार गुप्त