- ट्रांसमीशन कम्पनी की दरों पर सार्वजनिक सुनवाई आयेाग सभागार में सम्पन्न, सार्वजनिक सुनवाई में उपभेाक्ता परिषद के सवालों पर सबकी चुप्पी
- उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा पहले ट्रांसमिशन सिस्टम में हो सुधार फिर दरों मे हो बढोत्तरी की बात, कहा फर्जी आंकडों पर शपथपत्र देने वाले अधिकारियों पर एफआईआर जरूरी
लखनऊ,25 जून 2019: उप्र पावर ट्रांसमिशन निगम लि. द्वारा दाखिल वार्षिक राजस्व आवश्यकता पर आज विद्युत नियामक आयोग में आम जनता की सार्वजनिक सुनवाई नियामक आयोग अध्यक्ष श्री आर पी सिंह व सदस्यगण श्री एस के अग्रवाल व श्री के के शर्मा की उपस्थित में आयेाग सभागार में प्रातः 11ः30 से 01ः00 बजे तक सम्पन्न हुयी। जिसमें बिजली कम्पनियों की तरफ से आधा दर्जन निदेशकों सहित ट्रांसमीसन कम्पनी के प्रबन्ध निदेशक श्री सान्थिल पाण्डियान सहित उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा सहित अनेको उपभोक्ता प्रतिनिधि उपस्थित थे।
आयेाग अध्यक्ष ने सुनवाई के बाद कहा कि सभी के सवालों का ट्रांसमिशन कम्पनी लिखित जवाब दाखिल करेगी और फिर आयोग उचित निर्णय लेगा।
ट्रांसमिशन कम्पनी द्वारा वर्ष 2019-20 के राजस्व आवश्यकता ट्रू-अप वर्ष 2016-17 व वर्ष 2017-18 व वर्ष 2018-19 का परफारमेन्स रिव्यू पर एक प्रजेन्टेशन दिया गया और उसके माध्यम से ट्रांसमिशन टैरिफ जो वर्तमान में 0.19 पैसा प्रति यूनिट है उसे 0.24 पैसा करने की मांग उठायी गयी।

सुनवाई में उस समय सब चुप्पी साध गये जब उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा मोटी तनख्वास पाने वाले बिजली इन्जीनियरों को 1 लाख से ढाई लाख का इनाम बांटा जाता है और काम के नाम पर राम मालिक है कम्पनियां घाटे में है। बिजली कम्पनियों में सुधार न होने का एक यह भी बडा कारण है कि प्रमुख सचिव ऊर्जा, बिजली कम्पनियांे के अध्यक्ष जब एक ही नौकरशाह होगा तो जवाबदेही कैसी तय होगी। उन्होंने कहा कि सभी पदों पर अलग अलग व्यक्ति को सरकार पर बैठाना चाहिये और उसकी जवाबदेही भी तय होनी चाहिये। उन्होंने कहा कि अभी बडा अध्यक्ष जो गलत सही डाटा पेश करता है उसी पर सब मोहर लगा देते हैं जो अपने आप मेे घोर चिन्ता का विषय है। इसी लिये बिजली कम्पनियों का डाटा पूरी तरह मनगढंत व फर्जी दिखायी देता है।
राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने सार्वजनिक सुनवाई में ट्रांसमिशन कम्पनी व पावर कारपोरेशन को आडे हाथों लेते हुये अनेकों ऐसे आंकडे साक्ष्यों सहित पेश किये पूरी सुनवाई में सब सन्न रह गये।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा जो ट्रांसमिशन कम्पनी वर्तमान टैरिफ में 26 प्रतिशत की वृद्धि चाह रही है उसे क्या यह पता है कि वर्तमान में उसका सिस्टम मिसमैच है। पहले उसमें सुधार होना चाहिये। 132 के वी सबस्टेशनों की कुल क्षमता 47801 एमवीए है। उसे यदि किलोवाट में निकाला जाये तो वह 4 करोड 30 लाख किलोवाट होगा वहीं प्रदेश के लगभग 3 करोड विद्युत उपभोक्ताओं का कुल भार 6 करोड 76 लाख किलोवाट है। यानि कि सिस्टम व उपभोक्ताओं के भार के बीच लगभग 2 करोड का गैप ऊपर से 20 प्रतिशत बिजली चोरी वह भी 1 करोड किलोवाट के बराबर होगा। ऐसे में सिस्टम मिसमैच है पीक आवर्स में डायवर्सिटी फैक्टर 1 अनुपात 1 होगा जिससे उपभोक्ताओं को उच्च गुणवत्ता की बिजली नही मिल पायेगी। बिजली कम्पनियाॅं एक तरफ प्रति सर्किट किलोमीटर इम्लाई खर्च में कमी बता रही है फिर दरें बढाने की बात क्यों कर रही है?
बिजली ट्रांसमिशन कम्पनी ने प्राइवेट लाइसेंस के बारे में चाहे वह कोबरा, आइसोलेक्स, अडानी, व अन्य के बारे में कुछ नही लिखा जबकि आने वाले समय में प्रत्येक साल उन पर भी लगभग रू0 2500 करोड का भार आयेगा। उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने ट्रांसमीशन कम्पनी के आंकडों पर सवाल उठाते हुये कहा इनकी याचिका में कुछ है प्रजेन्टेशन में कुछ है और वेससाइट पर कुछ है यह कैसे चलेगा। फर्जी आंकडों पर आयोग को सख्त होना पडेगा और यदि कम्पनियां न सुधरें तो उनके खिलाफ एफआईआर गलत शपथपत्र देने पर होनी चाहिये।
गुजरात, मध्यप्रदेश की तरह हर तीन महिने में आयोग को डाटा मंगाकर देखना चाहिये और उनके लिये परफारमेन्स स्टैण्डर्ड तय होना चाहिये।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा एमवाईटी टैरिफ में कुल ऊर्जा जो ट्रांसमीशन लाइन पर फलो होगी उसे 1 लाख 66 हजार मिलियन यूनिट बताया गया था अब बदलकर 1 लाख 18 हजार मिलियन यूनिट बताया जा रहा है यानि कि उसमें 28 प्रतिशत की कमी। यह गोलमाल क्या है?
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने ट्रांसमीशन सिस्टम की उपलब्धता पर सवाल खडा करते हुये कहा जहाॅं उ0 प्र0 में वर्ष 2014-15 तक ट्रांसमीशन सिस्टम की उपलब्धता 99.64 प्रतिशत थी अब वह घटकर 99.03 प्रतिशत हो गयी है जबकि देश के अन्य राज्यों में यह काफी सही स्थिति में है। इसी प्रकार उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कैप्टिलाइजेशन में प्रति सर्किट किलोमीटर खर्च के मामले पर बडा सवाल उठाते हुये कहा कि विगत वर्ष 8 राज्यों की रेटिंग में उप्र दूसरे नम्बर पर था अब वह खिसक कर 6ठवीं रैंक पर कैसे आ रहा है यह सब जांच का विषय है।
इसी प्रकार पुराने वर्ष के आंकडों पर सवाल उठाते हुये उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा वर्ष 2014-15 में ट्रांसमीशन ट्रासफार्मर का डैमेज रेट महाराष्ट्र में 1.35 प्रतिशत था, गुजरात में 0.76 प्रतिशत था उस वक्त यूपी में 6.94 प्रतिशत था। वर्तमान में कितने प्रतिशत पर है यह जाॅंच का विषय है।







