डॉ दिलीप अग्निहोत्री
उत्तर प्रदेश की वर्तमान सरकार को विरासत में बेहतर शिक्षा व्यवस्था नहीं मिली थी। शिक्षा की गुणवत्ता, अनियमित सत्र, नकल फर्जी डिग्री, ट्रांसफर पोस्टिंग में भ्र्ष्टाचार आदि से संबंधित अनेक समस्याएं थी। लेकिन पिछले दो वर्षों में ऐसी अनेक समस्याओं का समाधान हुआ है। प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और माध्यमिक व उच्च शिक्षा मंत्री डॉ दिनेश शर्मा इस उपलब्धि पर सन्तोष व्यक्त करते है। उनका कहना है कि सरकार को सत्र नियमित करने, नकल विहीन परीक्षा कराने, ट्रांसफर पोस्टिंग को भृष्टाचार मुक्त करने, पारदर्शिता लाने आदि में शतप्रतिशत और अभूतपूर्व सफलता मिली है। इसके बात उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को सर्वोत्तम बनाने की दिशा में प्रयास किये जा रहे है।उनका कहना है कि शिक्षा के संबन्ध में विसंगीति समाज के लिए हानिप्रद होती है। सरकार इसे समाज की भलाई का माध्यम बनाना चाहती है। वर्तमान सरकार के पहले नकल व्यवसाय चल रहा था। इस सरकार ने नकल रोकी। इसके बाद पांच लाख लोगों ने परीक्षा छोड़ी। जांच में पता चला कि बड़ी संख्या में फर्जी विद्यार्थी थे, चार पांच जगहों से हजारों लोग फार्म भरते थे। छात्रों के उत्पीड़न के बिना नकल विहीन परीक्षा सुनिश्चित की गई। पढ़ाई का समय और गुणवत्ता में वृद्धि की गई। अवकाश कम किये गए। एक ही कदम में एक पाठ्यक्रम लागू किया। देश में सबसे सस्ती पुस्तकें उत्तर प्रदेश में ही मिल रही है। माध्यमिक शिक्षा में कलेंडर लागू किया। उसी के अनुरूप पढ़ाई, परीक्षा सुनिश्चित हुई।
दो वर्ष में दो सौ से अधिक विद्यालय खोले गए। इसके पहले कई वर्षों में मात्र अड़तालीस कालेज खुले थे। शिक्षकों की कमी दूर की जा रही है। पाठ्यक्रम में बदलाव हुआ। लेकिन इसे लेकर कोई दो और भेदभाव का आरोप नहीं लगा। दो वर्ष में बीस प्रतिशत विद्यर्थियो की संख्या बोर्ड में बढ़ गई। अधिकारियों के स्थानांतरण की पारदर्शी प्रणाली लागू की गई। यह व्यवस्था ऑनलाइन कर दी गई है। जबकि समस्याओं का ध्यान रखा जाता है। पहले ट्रांसफर उद्योग चलता था। अब सरकार ने इसे समाप्त कर दिया है। प्रत्येक जोन में मॉडल स्कूल स्थापित किये गए। इसमें समाज का सहयोग लिया जा रहा है। ढाई महीने चलने वाली परीक्षा मात्र सोलह दिन में होने लगी। यह क्रन्तिकारी सुधार है। सरकार का राजस्व भी बढा है। रोजगारपरक पाठ्यक्रम शुरू किया गया। महापुरुषों के नाम पर शोध पीठ बनाई जा रही है।
उच्च शिक्षा में भी कलेंडर बनाया गया। इसे प्रभावी ढंग से लागू किया गया।निजी विश्वविद्यालयों के लिए एक एक्ट बनाया गया। इससे शिक्षक और ढांचागत स्थितियों को ध्यान में रखा गया। विद्यर्थियो का भी उत्पीड़न बन्द होगा। राष्ट्रीय रैंकिंग में भी सुधार हो रहा है। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षा का फंड बढ़ाया है। फंड के साथ ईमानदारी से कार्य करने की इच्छाशक्ति होनी चाहिए। अन्यथा फंड भी भृष्टाचार की भेंट चढ़ जाता है। पिछली सरकारों में ऐसा ही होता था। वर्तमान सरकार फंड का पारदर्शी उपयोग कर रही है। इससे बड़ा सुधार हुआ है। विदेशी अखबारों ने लिखा कि उत्तर प्रदेश की शिक्षा में क्रांतिकारी सुधार हो रहा है। निजी स्कूलों में फीस को नियंत्रित करने का प्रयास किया जा रहा है। प्राइमरी स्कूलों के बच्चों को ड्रेस, स्वेटर, जुते, मोजे दिए जा रहे है। मिडडे मील की गुणवत्ता में सुधार लाया गया है।
यूपी बोर्ड ने छात्रों को अन्य बोर्डो की भांति नम्बर देने पर विचार किया गया है। लेकिन बच्चों को मेधावी बनाने पर जोर दिया जा रहा है। यही देश के कर्णधार बनेंगे। योग्यता के आधार पर ही नम्बरों को प्रतामिकता दी जाएगी। प्रवेश परीक्षाओं में योग्यता हो प्रमाणित होती है। स्वस्थ प्रतियोगिता को सरकार बढ़ावा दे रही है। उत्तर प्रदेश की शिक्षा का चहुमुखी विकास हो रहा है। निजी व सरकारी क्षेत्र के सहयोग से प्रदेश के अनेक इलाकों में एजुकेशन हब बनेंगे। अनेक अनुबंधों से रोजगार का अवसर भी बढ़ेगा। सरकार समस्याओं का समाधान कर रही है। साठ हजार करोड़ रुपये का निवेश शिक्षितों को अवसर प्रदान करेगा।
बच्चों को नम्बरों की दौड़ में नहीं लगाना चाहिए। उनका पढ़ना आवश्यक है। लेकिन अच्छा इंसन बनना ज्यादा जरूरी है। छोटे बच्चों पर बस्ते का बोझ अधिक नहीं होना चाहिए। पढ़ाई के अलावा उनको किसी हुनर के प्रति भी लगाव बढ़ाना चाहिए। संगीत, कला, पर्यावरण, खेल आदि किसी क्षेत्र में इन्हें रुचि के अनुसार भेजना चाहिए। ये सभी कार्य पढ़ाई के साथ चल सकते है।
पिछली सरकारों ने शिक्षा के क्षेत्र पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया। कुछ वर्ष पहले तक सत्र नियमित नहीं थे , नियमित दीक्षांत समारोह के प्रति पर्याप्त सजगता का भाव नहीं था। गुणवत्ता की भी समस्याएं थी। उपमुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री डॉ दिनेश शर्मा ने इस ओर विशेष ध्यान दिया। कुलपतियों के सम्मेलन के माध्यम से विचार विमर्श का दौर चला। सत्र नियमित हुए। दीक्षांत समारोहों आयोजित होने लगे। सत्र नियमित होते है तो विद्यर्थियो का अमूल्य समय बर्वाद नहीं होता। समय पर वह परीक्षा फल ,डिग्री लेकर आगे की तैयारी कर सकते है।
डॉ दिनेश शर्मा को सत्र नियमित करने और दीक्षांत समारोह के नियमित आयोजन में सफलता मिली । नकल विहीन परीक्षा के प्रति भी उन्होने कटिबद्धता दिखाई । इसके भी सार्थक परिणाम दिखाई दिए।
दिनेश शर्मा सुधार की दिशा में प्रयत्नशील रहते है। इस प्रकार पहले की अपेक्षा अनुकूल स्थिति है। इसका सकारात्मक परिणाम भी दिखाई दे रहा है। चालू शैक्षिक कलैण्डर का निर्धारण, नकल, फर्जी अंकतालिका एवं उपाधियों पर नियंत्रण, नवीन नैक मूल्याकंन प्रक्रिया का अनुपालन, विश्वविद्यालयों के नये नियमों के परिप्रेक्ष्य में शैक्षिक संवर्ग के रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया, शोध पीठ की स्थापना एवं शोध, विश्वविद्यालयों के बढ़ते वित्तीय भार के सापेक्ष वित्तीय संसाधन विषय पर व्यापक सुधार किया जा रहा है। विश्वविद्यालयों में वित्तीय संसाधन के संबंध में राज्यपाल ने तीन सदस्यीय कुलपतियों की समिति गठित की गईं। केन्द्र सरकार ने जो शिक्षा नीति घोषित की है उस पर भी विचार चल रहा है। शिक्षा की गुणवत्ता के साथ-साथ शोध की गुणवत्ता बढ़ाने का कार्य चल रहा है।
शोध और शोध पीठों का लाभ समाज को मिल रहा है। उत्तर प्रदेश में उच्च शिक्षा पटरी पर आ गयी है। उच्च शिक्षा में मौलिक परिवर्तन हुये है। दीक्षान्त समारोह समय पर तथा भारतीय वेशभूषा में सम्पन्न हो रहे हैं। फर्जी अंक तालिका एवं उपाधि व्यवसाय बन गया था। यह समाप्त हो चुका है। ई लर्निंग, सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अनुसार शैक्षिक दिवस, प्रवेश, परीक्षाफल, शिक्षकों की उपलब्धता, आधारभूत सुविधाएं, ई-लाईब्रेरी, अभिलेखों की डिजिटाइजेशन आदि को भी प्रोत्साहन दिया जा रहा है। दीक्षान्त समारोह कैलेण्डर के अनुसार सभी विश्वविद्यालयों के दीक्षान्त समारोह तिरासी दिवसों में सम्पन्न होकर छात्र छात्राओं को उपाधियाँ वितरित हो जायेंगी। बेसिक शिक्षा में पहले बदहाली थी। मूलभूत सुविधाओं का अभाव था।
योगी सरकार ने इसमें भी बड़े सुधार किए थे। इसमें शिक्षकों का समायोजन किया गया। इसके पहले कहीं शिक्षक ज्यादा थे, कहीं कम थे। अब स्थिति सुधरी है। उनहत्तर हजार शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया चल रही है। इसके बाद बेसिक शिक्षा में शिक्षकों की कमी दूर हो जाएगी। बच्चों को समय पर ड्रेस,स्वेटर, कॉपी, किताब ,आदि मिल रहे हैं। पहले वर्ष स्वेटर मिलने में कुछ बिलंब हुआ था। इस बार समय से स्वेटर उपलब्ध करा दिए जाएंगे। पहले खाकी ड्रेस थी। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि इस ड्रेस में बच्चे छोटे होमगार्ड लगते है। इसे बदला गया। खादी के दो जोड़ी यूनिफार्म दिए जाएंगे। डेढ़ करोड़ विद्यार्थी बेसिक शिक्षा में है। इतनी अनेक देशों की जनसंख्या है। फिर भी सरकार सुधार की दिशा में चल रही है। जिन स्कूलों में जगह है वहा बागवानी की जाएगी। ढांचागत सुधार चल रहे है। समाज का भी सहयोग लिया जा रहा है। स्कूल चलो अभियान प्रभावी ढंग से चल रहा है।






