कजरी:
रिमझिम बरसै अषाढ़
नदी नारा गयें बाढ़,
मोरा मन नाही लागे रे भवनवा मा।
कइसे अउब्या पिया अबकी सवनवा मा।।
मेघा छाये जोर जोर
मोर करै लागें शोर
चोर घूमि घूमि ताकऽ थें अँचरवा मा
कइसे अउब्या पिया अबकी सवनवा मा।।
रात कारी अन्हियारी
बिज्जू दमकै मझारी
झरि लागे बून भारी रे अँगनवा मा।
कइसे अउब्या पिया अबकी सवनवा मा।
खेत वन हरियाये
पानी ताल उपराये,
लहराये है फसल रे सिवनवा मा।।
कइसे अउब्या पिया अबकी सवनवा मा।।
सूनी सेज ना सुहाये
मोह सजना सताये,
मेघ छाये बरसाये रे नयनवा मा।
कइसे अउब्या पिया अबकी सवनवा मा।।
बान्हे नेहिया तोहार
करि सोरहौ सिंगार
बा बहार सैंया तोहरे गोहनवा मा।
कइसे अउब्या पिया अबकी सवनवा मा।।
घेरे कजरी बदरिया
डरबै झूला अमरइया
गउबै कजरी संगे तोहरे झुलनवा मा।
कइसे अउब्या पिया अबकी सवनवा मा।।
-अरुण कुमार तिवारी की वॉल से








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