डॉ दिलीप अग्निहोत्री
खादी और सहकारिता वस्तुतः एक विचारधारा है, जिसके सामाजिक सरोकार है। इसका विस्तार अर्थव्यवस्था तक है। इनके माध्यम से बड़ी संख्या में लोगों की आर्थिक स्थिति को सुधारा जा सकता है। भारतीय परिवेश में इनका विशिष्ट महत्व है। उत्तर प्रदेश सरकार इन दोनों पर ध्यान दे रही है। किसानों की आय वृद्धि करने में सहकारिता महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह कर रहा है। सहकारी क्षेत्र की संस्थाओं की प्रगति, सुधार और उनके कामकाज को अधिक से अधिक स्वायत्तता प्रदान करने की दृष्टि से राज्य सरकार ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाये हैं। कृषि उत्पादों की परिभाषा को विस्तारित करके और अधिक व्यापक किया गया है। अब पोल्ट्री, फिशरीज, वानिकी, हार्टीकल्चर, पशुपालन, खाद्य एवं अखाद्य तेलों, पशु आहार एवं ग्रामीण शिल्प एवं खेती बाड़ी से जुड़ी गतिविधियों को भी सम्मिलित करते हुए सहकारिता विभाग सहयोग दे रहा है। इससे सहकारिता का दायरा बढ़ा है। हमारे कृषि प्रधान देश में कृषि ऋण ढांचे की महत्ता बहुत अधिक है, इससे गावों और किसानों का काफी लाभ हुआ है।किसानों एवं खेतिहरों के उत्थान व उनके सर्वांगीण विकास के लिए सहकारिता एक बेहतर माध्यम है। सहकारिता विभाग के अन्तर्गत विशेष रूप से निर्बल वर्ग के किसानों को अल्पकालीन फसली ऋण, उर्वरक एवं उन्नतशील बीज कृषियन्त्र आदि का वितरण कम दर पर किया जाता है। कृषकों को फसल उगाने एवं उनकी आय में वृद्धि करने के लिए सहकारी साख का त्रिस्तरीय ढाँचा है। जिसमें प्रदेश स्तर पर कोआपरेटिव बैंक लि लखनऊ, जिला स्तर पर पचास जिला सहकारी बैंक और न्याय पंचायत स्तर पर सात हजार चार सौ उन्यासी प्रारम्भिक कृषि ऋण सहकारी समितियाँ कार्यरत हैं। इसके साथ ही दीर्घकालीन ऋण वितरण का कार्य भी उप्र सहकारी ग्राम विकास बैंक की कुल तीन सौ तेईस शाखाओं के माध्यम से किया जाता है।
किसान अपने कृषि कार्यों के लिए सहकारी संस्थाओं से आवश्यकतानुसार ऋण लेकर अपनी खेती बेहतर ढंग से करते हुए अपना विकास करते हैं। किसानों की ऋण वितरण में बहुत सहूलिते दी जाती है। सहकारी संस्थायें किसानों का सम्मान करते हुए उनको ऋण प्रदान करती है। उप्र सरकार की मंशा है कि किसानों को ऋण प्रदान करने में किसी भी प्रकार की समस्या न हो, इसको ध्यान में रखते हुए सहकारिता विभाग के अन्तर्गत सहकारी संस्थायें किसानों की आय वृद्धि हेतु निरन्तर प्रयास कर रही है।
उप्र में किसानों को प्रारम्भिक कृषि ऋण सहकारी समिति के माध्यम से प्रदान किये जाने की व्यवस्था है। इस कार्य के लिए किसान क्रडिट कार्ड योजना लागू की गई है। जिसके अन्तर्गत अठारह लाख से अधिक किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड प्रदान करते हुए लाभान्वित किया जा रहा हैं। सहकारिता विभाग किसानों की आय बढ़ाने के लिए मित्रवत् कार्य करते हुए पूरा सहयोग दे रहा है। किसानों को इससे लाभ भी हो रहा है।
इसी प्रकार खादी केवल उद्योग ही नहीं एक विचारधारा है। कुछ समय पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि जब कोई व्यक्ति खादी का वस्त्र खरीदता है तो इस कार्य में लगे कर्मियों के घर में दीपावली का एक दिया जलता है। महात्मा गांधी जी की एक सौ पचासवीं जयन्ती के अवसर पर पहली बार पूरे प्रदेश में उन्नीस जुलाई से निरंतर विशेष जागरूकता कार्यक्रम चलाया जायेगा। इसमें खादी एवं ग्रामोद्योग की योजनाओं, रोजगार परक कार्यक्रमों एवं शासन की नीतियों से लोगों को अवगत कराते हुए कार्यरत उद्यमियों के उत्पाद विकास, गुणवत्ता व आधुनिक तकनीक की जानकारी उपलब्ध कराई जायेगी।
जागरूकता कार्यक्रम प्रदेश के सभी पचहत्तर जनपदों में शिविर लगाकर आयोजित होंगे। इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए स्थानीय स्तर पर मंत्री, सांसद एवं विधायकों की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी। कमजोर वर्गों को विभिन्न रोजगारपरक योजनाओं और कार्यक्रमों से लाभान्वित किये जाने पर बल दिया जायेगा, ताकि इस वर्ग विशेष के लोगों को स्वरोजागर के प्रति जागरूक करके उन्हें अपने गांव में ही उद्यम लगाकर व्यवासाय शुरू करने हेतु प्रेरित किया जा सके।
राज्य सरकार ने प्रदेश में रोजगारपरक कार्यक्रमों को प्रत्येक स्तर पर बढ़ावा देने को अपनी प्रमुख प्राथमिकताओं में रखा है। उन्हें खादी एवं ग्रामोद्योग की विभिन्न योजनाओं के तहत प्रशिक्षण देने की भी व्यवस्था की गई है। खादी एवं ग्रामोद्योग में स्वरोजगार की अपार सम्भावनाएं हैं। जाहिर है कि सहकारिता और खादी दोनों का संबन्ध समाज के कमजोर वर्गों से है। इसको कारगर बनाने की जिम्मेदारी सरकार की है।







