मैने एक फ़िल्म निर्देशक से पूछा-
आप फिल्मों में अश्लीलता
क्यों दिखाते हैं ?
वह बोला-हम तो
आपके पास आते नहीं
आप खुद ही क्यों
देखने चले आते हैं
सच तो यह है
अश्लीलता आपकी
आंखों में है
और इसी की बदौलत
फिल्मों में टिकटों की
बिक्री लाखों में है
यह दर्शकनुमा आदमी
भी अजीब है
अगर हम हीरोइन को
पूरे कपड़े पहना भी दें
तो भी वह दाएं बाएं से
अश्लीलता खोजता है
जनाब !हम जानते हैं
यह आदमी नाम का जीव
कहाँ और किस सीमा तक
गन्दा सोचता है
इसलिए हम उसे
जैसा है वैसा ही दिखाते हैं
पर आप कुछ और देखने
सोचकर चले आते हैं
और आपको क्या पता
एक फ़िल्म को
सेंसरबोर्ड से पास कराने में
निर्माता के खुद के
कपड़े उतर जाते हैं
तो क्या वह अपने लिए
कपड़े का भी न इंतज़ाम करे
– अनूप श्रीवास्तव







