लखनऊ,25 सितम्बर 2019: एससी/एसटी छात्रों ने सोमवार को निःशुल्क प्रवेश प्रक्रिया एवं शुल्क प्रतिपूर्ति की व्यवस्था बहाली करने के लिए हजरत गंज स्थित अमेडकर प्रतिमा के सामने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन किया।

बताया जाता है कि उत्तर प्रदेश सरकार के समाज कल्याण विभाग द्वारा अनुसूचित जाति/जनजाति छात्रों की निःशुल्क प्रवेश प्रक्रिया एवं शुल्क प्रतिपूर्ति की व्यवस्था शासनादेश संख्या 225/26-3-2006-4(56)/96-टी। सी।, दिनांक 26 जून 2006 के शासनादेश संख्या 2721/26-03-2008-04 (358)/2007 द्वारा उत्तर प्रदेश के समस्त शिक्षा संस्थानों में निःशुल्क प्रवेश प्रक्रिया एवं शुल्क प्रतिपूर्ति की व्यवस्था की गयी थीl लेकिन समाज कल्याण विभाग द्वारा पत्रांक सी-1871/स। प।/ शिक्षा-अ/3/154/2019-20, 20 अगस्त 2019 एवं ज्ञापन संख्या 148/2018/2063/ 26 मार्च 2018-04 (358)/ 07 टी। सी।/lll26 जून 2018 द्वारा उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति/जनजाति छात्रों की निःशुल्क प्रवेश प्रक्रिया एवं शुल्क प्रतिपूर्ति नियमावली 2012 (छठवां संसोधन)-2017 जारी की गयी निमयावाली के नियम 12(l) (क) में प्रावधान किया गया है गैर सहायता प्राप्त निजी प्रबंध शिक्षण संस्थान में अनुसूचित जाति जनजाति छात्रों के संबंध में शासनादेश संशोधित करके निःशुल्क प्रवेश एवं शुल्क प्रतिपूर्ति की व्यवस्था समाप्त कर दी गई है l
प्राप्त जानकारी के अनुसार शासनादेश में यह उल्लेखित किया गया है कि भारत सरकार सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा अप्रैल 2018 में जारी गाइड लाइन के अनुक्रम में यह संशोधन किया गया है जबकि सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की गाइड लाइन में स्पष्ट उल्लेख है कि प्रतिपूर्ति शुल्क की धनराशि निजी शिक्षण संस्थाओं के बैंक खातों के स्थान पर सीधे छात्र-छात्राओं के बैंक खातों में शुल्क ट्रांसफर किया जाएगा इस प्रकार मनमाने तरीके से कतिपय अधिकारियों द्वारा अनुसूचित जाति जनजाति के छात्र, छात्राओं को शिक्षा से वंचित किया जा रहा है जिसके कारण वर्ष 2018 और 2019 में 2183940 अनुसूचित जाति/जनजाति के गरीब छात्र छात्राओं ने आवेदन किया जिसमे निजी शिक्षण संस्थाओं के टेक्निकल और प्रोफेशनल कोर्सेज शामिल थे जिनकी प्रवेश प्रक्रिया समाप्त कर दी गयी और बहुत सारे छात्र परीक्षा में सम्मिलित नहीं हो पाए इस प्रकार इन वर्ग के छात्र-छात्राओं के शिक्षा संबंधी मौलिक अधिकार का स्पष्ट उल्लंघन है तथा उनका भविष्य प्रभावित हो रहा है ल
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि समाज कल्याण विभाग द्वारा शासनादेश पत्रांक सी-1871/स। प।/ शिक्षा-अ/3/154/2019-20, 20 अगस्त 2019 एवं ज्ञापन संख्या 148/2018/2063/ 26 मार्च 2018-04 (358)/ 07 टी। सी।/lll26 जून 2018 का परिशीलन कर उसे निरस्त किया जाए l
विषय को गम्भीर रूप से लेते हुए संयुक्त समस्त अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति जाति छात्र संगठनों के तत्वधान में शांतिपूर्ण एवं अहिंसात्मक तरीके से सरकार के खिलाफ धरना प्रदर्शन व क्रमिक अनशन हेतु प्रदेश व्यापी आंदोलन प्रारंभ कर दिया गया है और यह विरोध प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा जब तक सरकार द्वारा जारी सशनादेश वापस नही लिया जाता और समस्त अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति जाति छात्रों को पुनः निःशुल्क प्रवेश एवं शुल्क प्रतिपूर्ति की एक उत्तम व्यवस्था नही बनाई जाती l
उपरोक्त मुद्दे को गम्भीर रूप से लेते हुए शांतिपूर्ण एवं अहिंसात्मक तरीके से सरकार के खिलाफ धरना प्रदर्शन व क्रमिक अनशन हेतु प्रदेश भर से लोग एकत्रित हुए जिसमे राज वर्धन जाटव छात्र नेता, बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर विश्वविद्द्यालय, लखनऊ एवं अशोक कुमार प्रभात, छात्रनेता- लखनऊ विश्वविद्द्यालय, लखनऊ, प्रेम कुमार बहुजन छात्रनेता व रमेश कुमार, सुनील सरोज, पवन कुमार, लक्ष्मण कुमार, वीरेन्द्र कुमार, बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर छात्रावास, लखनऊ तथा Dasfi प्रदेश अध्यक्ष- अभिषेक राव, सुधीर कुमार के जी एम यू, लखनऊ व चंद्रशेखर चौधरी-पूर्व उपाध्यक्ष व एड। प्रदीप वर्मा इलाहाबाद विश्वविद्यालय, डॉ आर बी रावत मुख्य वक्ता एवं डॉ शिव कुमार- कालीचरण पी जी कालेज, डॉ छविलाल बौद्ध- ख्वाजा मुईनुद्दीन चिस्ती विश्वविद्द्यालय, राहुल आर्यन, शकुन्तला मिश्रा विश्वविद्द्यालय, पासी जयवीर सिंह, बी बी ए यू लखनऊ, मौर्यन्कुर प्रभात महर्षि विश्वविद्द्यालय, लखनऊ, उमेश छात्र नेता एल एल बी के के सी, रंजीत कुमार –छात्रनेताव डॉ भीमराव आंबेडकर स्टूडेंट फ्रंट, लखनऊ व लक्ष्य टीम लखनऊ तथा अनुसूचित/अनुसूचित जनजाति बार कौंसिल एसोसिएशन, लखनऊ तथा जनजागृति मंच, भीम आर्मी स्टूडेंट्स फ्रंट, पंचशील वीकास समिति, आंबेडकर कारवां, मिशन सोसिअल लिबर्टी, सामाजिक चेतना मंच, बहुजन सम्यक संगठन, मात्रे शोध संस्थान, समाजवादी बहुजन युवा मंच एवं प्रदेश भर के समस्त जिलों से आये छात्र/छात्राएं एवं छात्र संगठनों ने भाग लियाl







