लखनऊ, 21 अक्टूबर, 2019: पंद्रहवें वित्त आयोग भारत सरकार के प्रतिनिधिमंडल सोमवार को भाजपा व अन्य पार्टियों के नेताओं से मिला और प्रदेश के विकास के सुझाव मांगे। इस दौरान कांग्रेस और भाजपा के नेताओं ने प्रदेश के विकास के लिए केंद्र से मिलने वाले अनुदान को बढ़ाये जाने के संबंध में अपने-अपने ढंग से तर्कपूर्ण प्रस्ताव रखे।
भारतीय जनता पार्टी के प्रतिनिधि मंडल में पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष जेपीएस राठौर और भाजपा सुशासन समिति के राज्य प्रमुख चंद्र भूषण पांडेय ने 15वें वित्त आयोग के अध्यक्ष व अन्य सदस्यों के साथ हुई बैठक में कहा कि यूपी में अपराध कम हुआ है और निवेश बढ़ा है। इस कारण आयोग को यूपी के विकास के लिए अधिकतम सहयोग और मदद देनी चाहिए। योजना भवन में हुई बैठक में 15वें वित्त आयोग के समक्ष भाजपा के प्रतिनिधि मंडल ने 12 बिन्दुओं पर अपना पक्ष रखा।
भाजपा प्रतिनिधि मंडल ने कहा कि देश का 2024 तक पांच ट्रिलियन डालर अर्थव्यवस्था का लक्ष्य है। उसमें उत्तर प्रदेश का एक ट्रिलियन डालर योगदान का संकल्प है। प्रदेश ने एफआरबीएम एक्ट को प्रभावी तरीके से क्रियान्वित किया है। इस निष्पादन को सी.आई.आई. द्वारा राजकोषीय निष्पादन एवं संकेतक (एफ.पी.आई.) के मानकों पर प्रदेश को सराहा गया है। वित्तीय अनुशासन को कड़ाई से लागू करने वाले राज्यों को संरक्षित एवं प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

गाँव को शहर सदृश और शहर समतुल्य अवसंरचना एवं सुविधाएं प्रदान करने की दृश्टि से संसाधनों के वितरण में सूत्र तय हों, जिससे स्मार्ट गांवों के विकास पर कार्य हो सके। इससे जहाँ शहरी आबादी के केन्द्रीकरण पर रोक लगेगी, वहीं बड़े शहरों की पर्यावरण चुनौतियों का भी समाधान निकल पायेगा।
पूर्व प्रस्तावित बैठक कांग्रेस कमेटी में प्रतिनिधिमंडल में पूर्व केन्द्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद एवं प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता डाॅक्टर अनूप पटेल शामिल रहे। इन नेताओं ने वित्त आयोग के अध्यक्ष एनके सिंह सहित प्रतिनिधिमंडल के सामने उत्तर प्रदेश के बेहतर आर्थिक विकास हेतु अपना सुझाव प्रस्तुत किया। बैठक में शामिल होने के पूर्व कांग्रेस के सदस्यों ने कांग्रेस विधानमंडल दल की नेता आराधना मिश्रा‘मोना’ के साथ वित्त आयोग के समक्ष रखे जाने वाले सुझावों पर गहन विचार-विमर्श किया।
वित्त आयोग के समक्ष पूर्व केन्द्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद एवं डाॅक्टर अनूप पटेल ने सुझाव रखते हुए कहा कि 14वें वित्त आयोग ने केन्द्र सरकार द्वारा प्रदेश को केन्द्रीय करों में से 42 प्रतिशत धनराशि देने का निर्धारण किया था, लेकिन प्रदेश का शेयर घटाकर 17.95 प्रतिशत कर दिया गया। इससे राज्य का भारी नुकसान था। केन्द्र के साथ प्रदेश में जिस प्रकार जीएसटी लागू किया गया, उससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को बहुत नुकसान हुआ है। नेताओं ने कहा कि 15वें वित्त आयोग प्रदेश की अनुमन्य धनराशि का शेयर इस बार घटाया नहीं जाना चाहिए।






