यत्र योगेश्वरः कृष्णो यत्र पार्थो धनुर्धरः ।
तत्र श्रीर्विजयो भूतिर्ध्रुवा नीतिर्मतिर्मम॥
जहाँ योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण हैं और जहाँ गाण्डीव-धनुषधारी अर्जुन है, वहीं पर श्री, विजय, विभूति और अचल नीति है- ऐसा मेरा मत है ॥
भगवान श्री कृष्ण ने गीता का उपदेश युद्ध स्थल पर दिया था। एक तरफ कौरव दूसरी ओर पांडव सेना युद्ध के लिए तैयार खड़ी थी। अर्जुन का मन विचलित था। उचित अनुचित का निर्णय करना उनके लिए कठिन था। वह दिग्भर्मित थे। लेकिन उन्होंने एक काम बहुत बढ़िया किया था। अर्जुन ने अपने रथ की कमान प्रभु श्रीकृष्ण को सौप दी थी। इसी परिस्थिति में सारथी बने प्रभु ने किंकर्तव्यविमूढ़ अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था।

यह प्रसंग आज भी प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में परिलक्षित होता है। कई बार अपना ही मन हृदय युद्ध स्थल जैसा हो जाता है। कौरव व पांडव की तरह परस्पर विरोधी विचारों के बीच द्वंद की स्थिति बनती है। उचित का निर्णय करना कठिन हो जाता है। शरीर भी दस इंद्रियों का रथ ही तो है। प्रभु को सारथी बना कर कर्म करता चल, अर्थात गीता के उपदेश के अनुरूप कर्म करना चाहिए। फल पर नियंत्रण नहीं है। जय पराजय, सुख दुख सभी में सम् भाव रहकर कर्म करने का उपदेश प्रभु ने अपने सखा अर्जुन को दिया था। इससे सुंदर प्रबंधन का अन्य कोई सूत्र हो नहीं सकता।
लखनऊ की श्रीमद भगवत गीता समिति गीता पाठ को लोकप्रिय बनाने का अभियान चला रही है। गीता में जीवन प्रबंधन है, भ्रम से बाहर निकलने का मार्ग है। आज के जीवन मे जो तनाव है, उसे गीता के नियमित पाठ से दूर किया जा सकता है। इसके पाठ से धर्म आधारित कर्म का भाव जागृत होता है।
इसके अंतर्गत अनेक कार्यक्रम चलाए जाते है। क्लास तीन से लेकर बारह तक के विद्यर्थियो गीता के श्लोक कंठस्थ कराए जाते है। इस समय प्रायः सभी विद्यर्थियो को गीता के श्लोक कंठस्थ है। इसी प्रकार गृहस्थ गीता अनुष्ठान का आयोजन किया जाता है। इसमें बड़ी संख्या में गृहस्थ लोग समवेत गीता पाठ करते है। तीसरे कार्यक्रम के रूप में गीता शलाका प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है। इसमें अंतरविद्यालय स्तर पर प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है।
इसमें प्रतिभागी विद्यार्थी गीता के कंठस्थ श्लोक सुनाते है। इसका उद्देश्य सभी विद्यर्थियो में गीता व संस्कृत के प्रति रुचि जागृत करना होता है। इस प्रतियोगिता में महाभारत से जुड़े सौ प्रश्न भी दिए जाते है। अधिकतम सही उत्तर देने वाले विद्यार्थियों को पुरष्कृत किया जाता है। इसके अलावा गीता स्वाध्याय का भी आयोजन किया जाता है। आठ दिसम्बर को वृहत स्तर पर गीता जयंती के आयोजन किया जाता है।
इस बार भी आठ दिसम्बर को महामना मालवीय विद्यालय में श्रद्धा और उत्साह के साथ गीता जयंती के आयोजन किया गया। इसमें सैकड़ो श्रद्धालुओं ने भगवतगीता का अखंड पाठ किया। महामना मालवीय मिशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष और श्रीमद भगवत गीता समिति के संरक्षक प्रभु नारायण श्रीवास्तव ने कहा कि इस महान ग्रन्थ की प्रासंगिकता सदैव रहेगी। इससे धर्म मार्ग पर कर्म करने की प्रेरणा मिलती है। उचित अनुचित का ज्ञान होता है। इसके नियमित पाठ से संस्कारो व धर्म भाव का जागरण होता है। अखंड पाठ के बाद कैलाश चन्द्र शर्मा, शिवसेवक उपाध्याय, कुंदन लाल शास्त्री ने भजन व श्लोक का गायन किया।
- डॉ दिलीप अग्निहोत्री







