कोई ग़ज़ल सुना कर क्या करना,
यूँ बात बढ़ा कर क्या करना,
तुम मेरे थे… तुम मेरे हो,
दुनिया को बता कर क्या करना।
तुम साथ निभाओ चाहत से,
कोई रस्म निभा कर क्या करना,
तुम खफ़ा भी अच्छे लगते हो,
फिर तुमको मना कर क्या करना।
सपनों की मंज़िल पास नहीं होती,
ज़िंदगी हर पल उदास नहीं होती ।।
खुदा पे यकीन रखना मेरा दोस्त,
कभी कभी वो भी मिल जाता है,
जिसकी कभी आस नहीं होती ।।
इस दिल मे प्यार था कितना,
वो जान लेते तो क्या बात होती।
हमने माँगा था उन्हें खुदा से,
वो भी मांग लेते तो क्या बात होती।
हमसे खेलती रही दुनिया,
ताश के पतों की तरह ।
जो जीता उसने भी फेंका ,
जो हारा उसने भी फेंका ।
- प्रस्तुति: डॉक्टर आरोही







