हिंदी संस्थान के स्थापना दिवस पर भारत-भारती सम्मान पटना की डाक्टर उषा किरन खान को दिया गया
लखनऊ, 30 दिसम्बर 2019: साहित्य समाज को आइना है। साहित्य साधना को यदि जातीय बंधनों में बांटने का प्रयास करेंगे या संक्रीण भावनाओं में बांधने का प्रयास करेंगे तो इससे साधना भंग होगी। यदि साधना भंग हुई तो समाज व राष्ट्र की अपूर्णीय क्षति होगी। दिग्गभर्मित समाज कभी लक्ष्य की प्राप्ति नहीं कर सकता। ये बातें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान के स्थापना दिवस पर कही। वे हिंन्दी संस्थान में आयोजित पुरस्कार समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर वर्ष 2018 का पांच लाख की धनराशि वाला सर्वोच्च भारत भारती सम्मान पटना की डॉ. उषा किरन खान को दिया गया।
उन्होंने कहा कि समाज और राष्ट्र की व्यवस्था में सामरिकता का दर्शन देता है। इसकी व्यवस्था को निरंतर प्रगति की ओर ले जाना हम सबका सामूहिक दायित्व है। साहित्य समाज को एक नई दिशा में लेकर आगे बढ़ने का प्रयास करता है। साहित्य साधना में लगे लोगों के लिए यह एक चुनौती है, क्याकि बीच-बीच में आकर कुछ लोग इसे भटकाने की कोशिश करते हैं। राष्ट्र की चेतना में लगे लोगों के लिए बीच-बीच में व्यवधान उत्पन्न करते हैं। साहित्य से जुड़े लोगों को उन सबसे लड़ते हुए आगे बढ़ना है।
उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हिंदी में अपने अभिभाषणों के माध्यम से न केवल दुनिया को अपने देश की ओर आकर्षित करते हैं, अपितु दुनिया को देश की ताकत का एहसास भी कराते हैं। उनके अभिभाषणों से पूरे विश्व में लोगों ने भारत के शक्ति का एहसास किया है। इससे भारत का गौरव बढ़ा है। इसके साथ ही हिन्दी भाषा को भी काफी सम्मान मिला है।
मुख्यमंत्री ने सभी साहित्यकारों से अपील की कि हमें समाज की ज्वलंत समस्याओं को एक रचनात्मक दिशा देने के लिए अपनी लेखनी से ऐसे प्रयास करने चाहिए, जिनमें व्यापक लोक कल्याण और राष्ट्र कल्याण का भाव निहित हो।
हृदय नारायण दीक्षित ने की अध्यक्षता:
विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में पांच लाख की धनराशि वाला सर्वोच्च भारत भारती सम्मान पटना की डॉ. उषा किरन खान को दिया गया। इसके अलावा चार लाख धन राशि वाला लोहिया साहित्य सम्मान पटियाला के डॉ. मनमोहन सहगल, हिंदी गौरव सम्मान वाराणसी के डॉ. बदरीनाथ कपूर, महात्मा गांधी साहित्य सम्मान भागलपुर के भगवान सिंह, पं. दीनदयाल उपाध्याय साहित्य सम्मान लखनऊ के डॉ. ओम प्रकाश पांडेय, अवन्तीबाई साहित्य सम्मान दिल्ली के कमल कुमार, राजर्षि पुरुषोत्तमदास टंडन सम्मान मणिपुर हिंदी परिषद इम्फाल को दिया जाएगा। इसके अलावा दो लाख धनराशि वाला साहित्य भूषण सम्मान समेत अन्य विभिन्न श्रेणियों में साहित्यकारों को सम्मानित किया गया।
साहित्य भूषण सम्मान:
डॉ. सुरेश प्रकाश शुक्ल (लखनऊ), वीरेंद्र आस्तिक कानपुर, जगतगुरु रामानन्दाचार्य (स्वामी रामभद्राचार्य), रामदेव लाल विभोर (लखनऊ), डॉ. आद्या प्रसाद द्विवेदी गोरखपुर, डॉ. पूरन चन्द टंडन दिल्ली, सुरेश बाबू मिश्र बरेली, डॉ. प्रताप नारायण मिश्र बाराबंकी, डॉ. रामसनेही लाल शर्मा फिरोजाबाद, डॉ. सूर्यपाल सिंह गोंडा, चंद्रिका प्रसाद कुशवाहा उन्नाव, डॉ. इन्दीवर पाण्डेय वाराणसी, डॉ. शशि तिवारी आगरा, नवनीत मिश्र लखनऊ, जगदीश तोमरए ग्वालियर, डॉ. बद्री प्रसाद पंचोली अजमेर, डॉ. भगवान शरण भारद्वाज बरेली, डॉ. उषा चौधरी लखनऊ, डॉ. श्यामसुन्दर दुबे मध्य प्रदेश, अशोक अग्रवाल हापुड़।
बाल साहित्य भारती सम्मान:
(सम्मान राशि- दो लाख) डॉ. भैरूलाल गर्ग (भीलवाड़ा), सूर्य कुमार पांडेय (लखनऊ), संजीव जायसवाल संजय (लखनऊ) को दिया गया। इसके अतिरिक्त लोक भूषण सम्मान : डॉ. शांति जैन, पटना को, कला भूषण सम्मान : मनोज कुमार सिंह, गाजियाबाद, विद्या भूषण सम्मान : डॉ. जगमोहन सिंह राजपूत, नोएडा, विज्ञान भूषण सम्मान : डॉ. प्रेमचंद स्वर्णकार, दामोह, पत्रकारिता भूषण : डॉ. रमेश चंद्र त्रिपाठी, लखनऊ, प्रवासी भारती हिंदी भूषण सम्मान : डॉ. उदय नारायण गंगू, मॉरीशस को दिया गया। बाल साहित्य सम्मान सुभद्रा कुमारी चौहान महिला बाल साहित्य सम्मान : सुषमा श्रीवास्तव लखनऊ, सोहन लाल द्विवेदी बाल कविता सम्मान : रामकुमार गुप्ता, खीरी, अमृत लाल नागर बाल कथा सम्मान : डॉ. राकेश चक्र, मुरादाबाद, शिक्षार्थी बाल चित्रकारी सम्मान : सुखवंत कलसी, कानपुर को दिया गया।







