लखनऊ: ऐतिहासिक श्री बुद्धेश्वर महादेव मंदिर, जो एसडीएम सदर की देखरेख में है, अब अव्यवस्था और कथित आर्थिक अनियमितताओं का अड्डा बन गया है। जहां भक्त भाव से बाबा के दर्शन करने आते हैं, वहां नियम-कानून की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
देर रात तक खुली ‘चढ़ावे की दुकान’?
मंदिर में न तो बाबा की आरती का कोई निश्चित समय है और न ही शयन की व्यवस्था। नियमानुसार तय समय पर कपाट बंद होने चाहिए, लेकिन यहां रात के 1 बजे तक कपाट खुले रहते हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि देर रात तक कपाट खोलने का मकसद श्रद्धालुओं से चढ़ावा और अवैध वसूली को बढ़ावा देना है। आस्था का बाजार खुला हुआ है, जबकि नियम ताक पर रख दिए गए हैं।
शिकायत पर ‘कागजी जांच’, गवाह खाली!
हाल ही में मुंडन और मांगलिक कार्यों के नाम पर पुजारियों द्वारा की जा रही अवैध वसूली की शिकायत IGRS पोर्टल पर दर्ज कराई गई थी। लेकिन जांचकर्ता लेखपाल आनंद श्रीवास्तव ने बिना मौके पर गवाहों के या भौतिक सत्यापन के ढुलमुल रिपोर्ट थोप दी। रिपोर्ट में शिकायतकर्ता को जबरन ‘संतुष्ट’ दिखा दिया गया, जबकि गवाहों वाले कॉलम खाली छोड़ दिए गए।
सवालों की बौछार:
- जब प्रशासन ने कोई शुल्क तय ही नहीं किया है, तो मंदिर परिसर में “यहां सभी कार्य निःशुल्क हैं” वाला बोर्ड क्यों नहीं लगाया गया?
- आस्था के नाम पर चल रही इस व्यावसायिक लूट को प्रशासन क्यों नजरअंदाज कर रहा है?
शिवभक्तों में गुस्सा, डीएम से उच्चस्तरीय जांच की मांग
स्थानीय जनता और शिवभक्तों में भारी आक्रोश है। लोग कह रहे हैं कि मंदिर को लूट का अड्डा बनाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। भक्तों ने जिलाधिकारी से पूरे मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।क्या अब प्रशासन इस ‘अंधेरगर्दी’ पर लगाम लगाएगा या आस्था का खेल चलता रहेगा?
फिलहाल नजरें जिलाधिकारी कार्यालय पर टिकी हुई हैं।







