पुलिस हुई सतर्क, प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों की गतिविधियों पर नजर
लखनऊ, 06 जनवरी 2020: रविवार को जेएनयू में हुई हिंसा पर यूपी में राजनीतिक उबाल रहा। एक तरफ जहां विपक्षी दलों ने भाजपा पर हमला बोला, वहीं भाजपा ने इसे अर्बन वामपंथ की तड़फड़ाहट के नतीता बताया। इन सबके बीच पुलिस प्रशासन सतर्क हो गया है। पूरे प्रदेश के विश्वविद्यालयों पर नजर बनाये रखने के निर्देश दिये गये हैं, जिससे शांति व्यवस्था बनाए रखी जाय।
घटना को अति गम्भीरता से लेना चाहिए: मायावती
जेएनयू में हुई हिंसा पर बसपा प्रमुख मायावती ने न्यायिक जांच कराने की मांग की। उन्होंने ट्वीट किया कि केंद्र सरकार को इस घटना को अति गम्भीरता से लेना चाहिए। इसके साथ ही इस घटना की न्यायिक जांच होनी चाहिए।
उच्च स्तरीय न्यायिक जाँच होनी चाहिए: अखिलेश यादव
वहीं सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि जेएनयू में जिस तरह नक़ाबपोश अपराधियों ने छात्रों और अध्यापकों पर हिंसक हमला किया है वो बेहद निंदनीय है। इस विषय में तत्काल उच्च स्तरीय न्यायिक जाँच होनी चाहिए.जेएनयू में शिक्षकों और छात्रों पर हमला करने वाले नकाबपोश लोगों को वह कम दिखाता है, जिससे सरकार डर के मारे शासन करने के लिए रुक जाएगी।
जेएनयू की घटना अर्बन वामपंथियों के तानाशाही है: मनीष शुक्ला
उन्होंने कहा कि भाजपा समाज का ध्रुवीकरण करने और असंतोष फैलाने के लिए हिंसा और नफरत का इस्तेमाल कर रही है। एबीवीपी भाजपा के तूफानी सैनिकों की तरह काम कर रही है। उन्होंने कहा कि जेएनयू में नक़ाबपोश अपराधियों को रोकने में नाकाम पुलिस द्वारा स्वराज इंडिया के प्रमुख योगेन्द्र यादव से बदसलूकी निंदनीय है। अन्याय के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने वाली पर अत्याचार कर दमन का प्रयास सरकार बंद करे।
वहीं भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता मनीष शुक्ला ने कहा कि जेएनयू की घटना अर्बन वामपंथियों के तानाशाही है। वहां पर पहले यह जांच होनी चाहिए कि कैसे नेट प्रभावित कर प्रवेश प्रक्रिया को बाधित किया गया। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि विपक्ष हर जगह उकासने का काम कर रहा है। उसको शांति व्यवस्था व सुशासन पच नहीं रहा है। इस कारण वह अब विश्वविद्यालयों को भी आग में झोंकने की कोशिश कर रहा है। मनीष शुक्ला ने नकाब पहनकर हमला करने वालों की दिल्ली पुलिस से विस्तृत जांच की मांग की। उन्होंने कई ट्वीट भी किये, जिसमें नकाब पोशों का चेहरा भी दिख रहा है।







