बच्चों को दी गयी विधिक जानकारी
लखनऊ विश्वविद्यालय के विधि संकाय द्वारा बच्चों में विधिक साक्षरता के उद्देश्य से सेंट मेरिज इंटर कॉलेज जानकीपुरम कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें विद्यार्थियों को उनके मौलिक अधिकार व मिलने वाली विधिक सहायता के बारे में जानकारी दी गयी। इस अवसर पर जिला जज गौरव कुमार ने बच्चों को मौलिक अधिकारों की जानकारी दी।
गौरव कुमार ने कहा कि जागरूकता के लिए बच्चे अच्छे एवं विश्वसनीय माध्यम होते हैं। वे अपने घर के साथ ही अपने आस-पड़ोस को भी जागरूक करते हैं। उन्होंने बताया कि प्राधिकरण का उददेश्य विधिक अधिकारों एवं कर्तव्यों की जानकारी समाज को देना है। उन्होंने अपने सम्बोधन में महिला हिंसा, महिला एवं बाल उत्पीडन, अधिनियम, बालश्रम, पाॅक्सो एक्ट, बाल विवाह, जुनाइल एक्ट,साइबर क्राइम की विस्तृत जानकारियां दी।
उन्होंने इन अधिनियमों में दण्ड प्राविधानों की जानकारी भी दी। उन्होंने कहा कि हमें अपने आसपास शहर व देश में क्या हो रहा है, इसकी भी जानकारी होनी चाहिए। हर क्षेत्र में जागरूक होकर अपने कानूनी अधिकारों को भी जानना चाहिए, जिससे हम हर क्षेत्र में आगे बढ़ सकें और जरूरत पड़ने पर कानूनी सहायता ले सकें। उन्होंने सभी लोगों से अपील की कि वे विधिक अधिकारों के प्रति स्वयं जागरूक होवें व दूसरों को भी जागरूक करें।
विधि संकाय के डीन प्रोफेसर सीपी सिंह बच्चों को कर्तव्यों के बारे में बताया। इसके साथ ही पठन-पाठन के लिए प्रोत्साहित करते हुए उनको विधिक अधिकारों के बारे में बताकर जागरूक किया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य मूल अधिकारों के बारे में जागरूकता लाना है। विधिक सहायता केंद्र ने छात्रों के लिए इस कार्यशाला का आयोजन किया।विधिक सहायता केंद्र के एक सदस्य आकाश शर्मा ने छात्रों को संविधान और मौलिक अधिकारोँ के बारे में जानकारी दी।
इस कार्यक्रम में बताया गया कि आखिर हमें मौलिक अधिकारों की आवश्यकता क्यों पड़ी? विधिक सहायता केंद्र के एक अन्य सदस्य वैभव राज कश्यप ने मौलिक कर्त्तव्यों पर एक प्रस्तुति दी। विधिक सहायता केंद्र के वरिष्ठ सदस्य पुनीत देशवाल ने पोक्सो एक्ट ,जुनाइल जस्टिस के बारे मे बच्चो से बातचीत की।
डीएलएसए सचिव पूर्णिमा सागर ने डीएलएसए और फ्री लीगल ऐड के बारे में बच्चों को बताया एवं बच्चों को भविष्य की शुभकामनाएँ दी।
साथ ही सचिव पूणिमा सागर ने कहा कि बच्चे उनके साथ होने वाली किसी भी प्रकार की घटना एवं दुर्घटना की जानकारी अपने परिवार जनो को देंगे ताकि दोषियो को दण्ड मिल सके। उन्होेंने बताया कि एक लाख से कम की आय वालों को निशुल्क विधिक परामर्श दिये जाने की व्यवस्था है इनके माध्यम से ऐसे लोगो को अपना मुकदमा लडने के लिए निशुल्क सहायता दी जा रही है। उन्होने लोगो से लोक अदालत के माध्यम से अपने वाद सुलझाने की सलाह भी दी।







