बहुत पहले तेलीबाग कस्बे में एक बहुत बड़ा व्यापारी रहता था। उसने अपने व्यापार को दिन-रात मेहनत करके इतना बड़ा बना लिया था कि उसके सामने उसी कस्बे के दूसरे व्यापारी टिक ही नहीं पाते थे।
उस व्यापारी का गुल्ली नाम का एक 13 वर्षीय बेटा था। वह रोज स्कूल से लौट कर अपने पिता के साथ उनके व्यापार में कुछ सहायता भी करता था। धीरे-धीरे इसी तरह दिन गुजर रहे थे। उस व्यापारी को हमेशा यही चिंता लगी रहती थी कि क्या मेरा बेटा गुल्ली मेरे व्यापार को आगे सही तरह से बढ़ा पायेगा या नहीं? अगर वह इस व्यापार को सही ढंग से नही संभाल सका तो मेरे व्यापार का क्या होगा? ऐसा विचार व्यापारी के दिमाग मे आने के बाद वह कुछ देर सोचने के बाद उस व्यापारी ने एक दिन अपने बेटे की परीक्षा लेने की ठानी।
दूसरे ही दिन उसने एक बड़े डिब्बे में कुछ भर कर अपने बेटे को पास बुलाया कर कहा, देखो बेटा “इस डिब्बे में कुछ भरा है। कुछ ऐसा करो कि इसके अंदर भरी हुई चीज की कीमत बढ़ जाए। यदि तुम ऐसा करने में सफल हो जाते हो तो मैं तुम्हारा जेब खर्चा दोगुना कर दूंगा।”
अपने पिता के मुहँ से यह बात सुनकर उसने डिब्बा खोला और उसके अंदर झांका उसने देखा कि उसमे गेहूं भरे हुए हैं। वह सोचने लगा कि इन गेहूं को उनकी असली कीमत से अधिक कैसे बढ़ाया जा सकता है।
कुछ क्षणों बाद उसके दिमाग में तुरंत एक विचार आया और वह तुरंत उन गेहूं को पीसने वाली चक्की पर ले गया और गेहूं को पीसवा कर आटा में बदलकर ले आया और अपने पिता से बोला, “देखिये पिताजी, मैं डिब्बे में रखी चीज को उसकी कीमत से ज्यादा कीमती बनवा कर ये आया हूँ। क्योंकि आटे की कीमत गेहूं से ज्यादा होती है इसलिये मैं सफल हुआ।”
गुल्ली की बात सुन कर उसका व्यापारी पिता बहुत खुश हुआ और उसने गुल्ली के जेबखर्चा को दोगुना कर दिया। लेकिन व्यापारी को अभी भी अपने बेटे की काबलियत पर कुछ शंका हो रही थी।
उसने फिर से अपने बेटे को बुलाया और इस बार कहा कि बेटा “यह आटे को लो और अब कुछ ऐसा करो कि इसकी कीमत पहले और अधिक हो जाये। यदि तुम ऐसा करने में सफल हो जाओगे तो इस दफे भी मैं तुम्हारा जेब खर्चा फिर से दोगुना कर दुंगा।”
गुल्ली बहुत खुश हुआ और उसने इस बार आटे को लेकर कुछ देर तक सोचने के बाद वह दौड़ता हुआ अपने घर के पास बनी बेकरी पहुंच गया और उसने उस सभी आटे की डबल रोटियां बनवा ली और खुशी से झूमता हुआ अपने पिता के पास आकर बोला, पिता जी “मैं उस आटे को ब्रैड में बदलकर ले आया हूँ। क्योंकि ब्रैड की कीमत आटे से ज्यादा होती है इसीलिए मैं जीत गया।”
इस बार भी उसका जेबखर्चा दोगुना हो गया। व्यापारी अब भी संतुष्ट नहीं था उसने फिर गुल्ली को बुलाया और कहा, “यह लो ब्रैड, और फिर कुछ ऐसा करो कि इसकी कीमत बढ़ जाए। मैं तुम्हारा जेब खर्चा फिर से दोगुना कर दुंगा।”
गुल्ली को फिर से अपना जेबखर्चा दोगुना करने का अवसर मिल जाने से वह बहुत खुश हुआ। उसने कुछ सोचा और ब्रैड को लेकर अपने घर में बनी रसोई में पहुंच गया। उसने अपनी माँ से केक बनाना कुछ दिनों पहले ही सीखा था।
फिर क्या था, उसमे उन डबल रोटियों को एक बड़ी केक में बदल दिया। फिर वह इस केक को लेकर अपने पिता के पास पहुंचा गया।
गुल्ली के हाथ केक देखते ही व्यापारी ने तुरंत अपने बेटे को गले लगा लिया और बोला, “आज मैं बहुत खुश हूँ। तुमने 20 रुपये किलो की गेहूं को 200 Rs. की केक में बदलकर यह साबित कर दिया कि तुम मेरे व्यापार को मुझसे भी ज्यादा आगे ले जाने में कामियाब होगे इसके साथ ही तुमने अपनी योग्यता से अपने जेबखर्च के लिये मिलने वाले रुपयों को दस गुना कर लिया है।”
अब व्यापारी पूर्ण संतुष्ट था कि उसके व्यापार को उसका बेटा नई ऊंचाइयों तक ले जायेगा और गुल्ली भी पहले से दस गुना जेबखर्च पाकर बहुत खुश था।
बच्चों ! यह कहानी मात्र एक प्रेरणादायक कहानी ही नहीं बल्कि किसी के लिए आपने जीवन मे सफल होने की एक बहुत बड़ा सूत्र भी है।
इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि यदि किसी चीज की कीमत को लगातार बढ़ानी है तो उसकी गुणवत्ता या योग्यता को लगातार बढ़ाते रहना होगा।यही बात हम इंसानों पर भी लागू होती है।
- प्रस्तुति: जी के चक्रवर्ती







