- मऊ जिले के घोषी थानान्तर्गत ग्राम औलियापुर का मामला: मुख्य नियमों को ताक पर रखकर वैकल्पिक नियमों को ढाल बना देर रात एक घर में घुसकर की महिलाओं से गाली-गालौज, घर वालों का आरोप
लखनऊ, 04 मार्च, 2020: भारत ने लिखित रूप से 73 साल पहले ब्रितानी हुकूमत से तो आजादी पा ली थी लेकिन कई मामलों में हम मानसिक रूप से आज भी गुलाम हैं। भारत में ब्रितानी हुकूमत की दमनकारी मानसिकता निरंतरता को प्राप्त है। प्रशासन या कहिये खासकर खाकी वर्दी अभी भी अंग्रेजों के रवैये से सरोकार रखते हैं। लोकतंत्र को ताक पर रखकर वो तानाशाही को ही प्रश्रय देकर खुद को प्रबल और खौफनाक दिखाना चाहते हैं।
ऐसी घटनाएं अपने आस-पास देखने को या अखबारों में पढ़ने को जरूर मिल जाती हैं। पर हम अन्य के साथ गलत होता देखकर सदा से शांत रहते आये हैं। बस यही कमजोरी, आमलोगों को सत्ता और नौकरशाही के समक्ष कभी-कभी बहुत बेबस और लाचार बना देती है।
बता दें कि मंगलवार देर रात की एक संवेदनहीन घटना है जो उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के घोसी थाने के ग्राम औलियापुर से है। 87 वर्षीय सेवानिवृत्त रेलवे स्टेशन अधीक्षक भुनेश्वर यादव ने पुलिस अधीक्षक मऊ को सिपाहियों की अभद्रता के खिलाफ शिकायती पत्र दिया है। उन्होंने बताया कि मंगलवार की देर रात करीब एक बजे छह-सात सिपाही बिना नेम प्लेट के उनके गाँव औलियापुर में उनके घर के दरवाजे पर आकर गाली-गालौज और अभद्रता शुरू कर दी। बात करने पर बताया की कोर्ट की तरफ से एनबीडब्ल्यू है 90 वर्षीय भोला यादव के खिलाफ।
वो कई दिनों से बीमार चल रहे थे और तारीख में कोर्ट में हाजिर नहीं हो पाये जिससे ये वारंट जारी किया। बड़े भाई भोला यादव अंदर लेटे थे और पुरुष सिपाही अंदर तक घुसते चले आये। घर में सो रहीं बहू-बेटियों की रजाईयाँ फेंकते हुए गाली-गालौज भी कर रहे थे। सारे नियमों को ताक पर रखकर घर की बहुओं से निर्लज्जता से पेश आ रहे थे। फिर 90 वर्षीय वृद्ध बीमार भोला यादव को रात में ही उठाकर घोसी थाना ले गये। पीड़ित ने पुलिस अधीक्षक से दोषी सिपाहियों के खिलाफ कार्रवाई की माँग की है।
बता दें भोला यादव पूर्व में गाँव के प्रधान भी रह चुके हैं और वो भारतीय जनवादी संघ के अध्यक्ष डा. मनोज यादव के बाबा हैं। डा. यादव घटना के वक्त दिल्ली में अपना उपचार करा रहे थे। उन्होंने देर रात ही घोसी कोतवाल को दूरभाष से सारी घटना के बारे में बताया। तो कोतवाल ने कोर्ट के एनबीड्ल्यू का हवाला दिया, कि यह हमारी ड्यूटी है। तब डा. मनोज ने बताया कि पुलिस नियमावली के अनुसार तो देर रात की घर में घुसकर होने वाली कार्रवाई पेशेवर मुल्जिमों के लिये है न कि किसी 90 वर्षीय वृद्ध बीमार के लिये। अभी हफ्तों अस्पताल में एडमिट रहने के बाद कुछ दिन पहले ही बाबा घर आये थे। तब कोतवाल ने नरमी दिखाते हुए कहा ठीक है उन्हें अभी छुड़वा दे रहे हैं। किन्तु सिपाहियों की अभद्रता के बारे में कहा उनको इस विषय की जानकारी नहीं है क्योंकि वह घटनास्थल पर नहीं थे। खैर कोतवाल घोसी ने त्वरित कार्रवाई करते हुए वृद्ध भोला यादव को उनके घर देर रात ही छुड़वा दिया व कोर्ट की प्रक्रिया अब अपने वाजिब नियम की तरह ही करने को बोले हैं। ऐसी कई घटनाएं कभी-कभार या कई बार पूर्व प्रेरित होती हैं इस दंश से खाकी बच जाये तो वास्तव में वो जनता के बीच अपनी अच्छी छाप बना सके।







