एक मौत, पचास हजार की क्षमता वाले क्रिकेट स्टेडियम में दर्शक विहीन मैच का आयोजन, दुनिया के ज्यादातर देशों के लिए वीजा स्थगित होना, सिनेमाहाल व स्कूलों का 2 अप्रैल तक बंद होना, बाजार में ऐतिहासिक मंदी जैसी अभूतपूर्व घटनाएं बताती हैं कि देश में कोविड-19 की दहशत किस हद तक व्याप्त हो गई है। दरअसल दुनिया में यह जिस तरह फैलता जा रहा है और उस कारण जिस तरह देश में इसकी मौजूदगी बढ़ती नजर आ रही है, उसे देखते हुए यही होना ही था। चीन तो खैर इसके उद्गम स्थल के रूप में जाना जाता है और उसके बाद इटली तथा फिर ईरान इस वायरस से सर्वाधिक प्रभावित देशों में गिने जा रहे हैं।

ईरान से हालांकि दो सौ से अधिक भारतीयों को लाया जा चुका है लेकिन अभी वहां और भी भारतीय फंसे हैं जिनको लाया जाना है। इसे देखते हुए उस ओर से भी खतरे होने से इन्कार नहीं किया जा सकता। जहां तक व्यापार की बात है तो अधिकांश देशों में इस वायरस के फैलने के अलावा विश्व व्यापार में प्रमुख स्थान रखने वाले चीन से आने वाले सामान तथा प्रोफेशनल्स के साथ इस वायरस के आगमन की आशंका लोगों को बुरी तरह ग्रस्त किए हुए है। नतीजा यह है कि व्यापारिक गतिविधियां धीरे-धीरे प्रभावित हो रही हैं।
गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार ने ऐतिहासिक मंदी का सामना किया। यह आई-गई घटना नहीं मानी जा सकती बल्कि इसे एक चेतावनी माना जाना चाहिए। यही हाल लखनऊ के अटल बिहारी वाजपेयी इकाना स्टेडियम में बिना दर्शकों की उपस्थिति के मैच कराने का निर्णय लिया गया है तो दिल्ली में सिनेमा हाल व स्कूलों को बंद कर दिया गया है। चहुंओर दिखाई दे रहा यह डर अकारण नहीं है। जरूरत यह है कि जितना कार्यक्रमों और कार्यों को स्थगित किया जा रहा है, अपनी दैनन्दिन क्रियाओं में सावधानी भी उसी तरह से बरती जाय।
मॉस्क की कालाबाजारी की खबरें बता रही हैं कि लोगों के संकट से पैसा बनाने वाले भी सक्रिय हैं जो बेहद खेदजनक बात है। महामारी घोषित किए जाने के बाद इसका स्वरूप समझने में दिक्कत नहीं होगी लेकिन सवाल यह है यथार्थ रूप से इसको कितनी गम्भीरता से लिया जाता है। आमतौर पर किसी ऐसे संकट के समय लोग चिकित्सकों के परामर्श पर तब तक ध्यान नहीं देते जब तक कि वे खुद इसके शिकार नहीं हो जाते लेकिन अब यह प्रवृत्ति बदलनी होगी क्योंकि उपेक्षा करने से व्यक्ति स्वयं के साथ अन्य लोगों को भी इसकी चपेट में ले आता है जिनमें उसके परिजन भी हो सकते हैं। ऐसे में कोरोना को लेकर जागरूकता का प्रचार-प्रसार इस समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।







