रोशनी करो, अंधेरा नहीं
मार के लाठी, मरहम पट्टी, क्या हे बे,
फेको थाली फिर दो खाना क्या है बे।
अच्छा है अंधकार में रौशन दीया करो,
लाइट बुझाके दीप जलाना, क्या है बे।
खुद अपने हाथों से करते हो अंधकार,
फिर दीपों का करो दिखावा, क्या है बे।
नफरत के बाज़ारों का क्यों कारोबार,
आपस में लड़ने का बहाना, क्या है बे।
भारत माता मौत पर जश्न मनाये क्यों,
आतिशबाज़ी शोर शराबा क्या है बे।
दौर है नाज़ुक मिल के लड़ो कोरोना से
ऐसे में आपस में लड़ाना, क्या है बे।
दीप जला के हमने अच्छा काम किया,
झुंड बना के बम-फटाखा, क्या है बे।
- नवेद शिकोह







