मन की बात: पंकज चतुर्वेदी के साथ
यह हमें याद करना होगा कि जब नोट बंदी हुई थी, तब पेट्रोल पंम्प वालों को लंबे समय तक पुराने नोट -करेंसी लेने की छूट मिली थी। तब भी चर्चा थी कि पेट्रोल पम्प ब्लेक मनी को नए नोट में सफ़ेद करने का जरिया बने हुए हैं।
एक रात में जब पेट्रोल-डीज़ल के रेत बढते हैं तो पेट्रोल पम्प मालिक करोड़ों के वारे न्यारे करते हैं । नगद बिक्री, बगैर बिल के बिक्री, घटतौली यह सब पेट्रोल पम्प में आम बात है। मिलावट हो गयी तो ओर भी माल बनता है। मान लीजिए बीती रात के स्टोक में हज़ार या दो हज़ार लीटर फ्यूल ऐसा है जिसे कागजी स्टॉक में दिखाया नहीं गया। अर्थात अगले सुबह दाम बढते ही उतने हज़ार लीटर का मुनाफ़ा बन जाता है , देश में हज़ारों पम्प हैं– सोच लें हर दिन कितने के वारे – न्यारे होते हैं । जब टेम्पो में भरे पुराने नोटों को नया करवाओगे तो उन्हें फायदा तो देना ही होगा।
जनता तो पिसने को ही है। चुनाव से पहले अचानक पांच सात रूपये कीमत घटा देंगी – वह– भी खुश हो जायेगी। फिर याद करें – पंच राज्यों का विधान सभा चुनाव– एक महीना एक पैसा दाम नहीं बढ़ा था — फ्यूल का- जब अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम ऐतिहासिक रूप से कम है , तब भी। दम ऊँचे जाने के पीछे कर की मार- कर चोरी ओर बिक्री में मुनाफे का खेल है जिसकी धार नोट बंदी तक जाती है।
- पंकज चतुर्वेदी की वॉल से







