Share Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp Post Views: 557 उषा कितना जानता हूँ मैं सुबह को सुबह को जिसने उतरते नहीं देखा हर-हर हरियाली पर बहुत-बहुत बर्फ़ पर तल-अतल जल पर जिसने हर सुबह को छोड़ दिया कल पर! कल मेरे बहुत क़रीब है सुबह उतनी नहीं है। – अविनाश मिश्र
गाजियाबाद में सीढ़ियों पर रोंगटे खड़े कर देने वाली रहस्यमयी घटना: बिल्ली या काले भैंसे पर सवार व्यक्ति?