केस्को कंपनी का सॉफ्टवेयर सफल तो फिर सभी बिजली कम्पनियो को क्यों नहीं दी जा रही जिम्मेदारी
पावर कापोरेशन में कितने ऐप कितने पोर्टल इस पर हुवा अरबो खर्च इसकी उपयोगिता की कौन करेगा जाँच?, उपभोक्ता परिषद् ऊर्जामंत्री व विद्युत नियामक आयोग के सामने रखेगा पूरा मामला और करेगा उच्च स्तरीय जाँच की मांग
लखनऊ, 20 जुलाई, 2020: यूपी प्रदेश में चाहे गलत बिलिंग का मामला हो चाहे सभी पोर्टलों में आ रही प्रॉब्लम का मामला हो या फिर उपभोक्ता द्वारा बिजली बिल जमा करने के बाद भी पुनः उसके बिल में जमा राशि जुड़ने का मामला हो या फिर उपभोक्ताओ को कोई फायदा देने की बात हो पावर कार्पोरेशन का बिलिंग सॉफ्टवेयर सबके के लिए चुनौती बना हुवा है?
इस मामले में जब उभोक्ताओ को फायदा देने की बात हो तो इनका सॉफ्टवेयर ऐसा घालमेल करता है कि उपभोक्ता बिल देखकर समझ ही नहीं पता उसे लाभ मिला की नहीं यही हाल इस समय वाणिज्यिक उपभोक्ताओ के फिक्स्ड चार्ज माफी के मामले में सामने आ रहा बिल में समझ में ही नहीं आता की लाभ मिला या नुकसान सबके पीछे पावर कार्पोरेशन का बिलिंग सॉफ्टवेयर जिसका टेंडर पिछले 2018 से लगातार 2 बार निकला और निरस्त हुवा अब तीसरे बार निकालने की तैयारी ऐसा क्या है कि पूरा पावर कार्पोरेशन दिन भर ऐसी में उलझा है वही दूसरी ओर एक कंपनी केस्को है उसका खुद का सॉफ्टवेयर बिलकुल सही चल रहा सवाल यह उठ रहा कि सभी कम्पनियो को केस्को की तरह अपने बिलिंग सॉफ्टवेयर की जिम्मेदारी क्यों नहीं दी जाती जिस बिजली कंपनी का बिलिंग सॉफ्टवेयर का यह हाल है उसका भगवान ही मालिक । पावर कापोरेशन में कितने ऐप कितने पोर्टल इस पर हुवा अरबो खर्च इसकी उपयोगिता की कौन करेगा जाँच?
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इस मसले पर उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेष कुमार वर्मा ने कहा बड़े दुर्भाग्य की बात है पिछले तीन सालो से बिलिंग टेंडरबाजी के पीछे क्या है टेंडर निकाला जाता है फिर उसे निरस्त किया जाता है कही न कही कोई बड़ा झोल है कितने पोर्टल कितने ऐप अब तक पावर कार्पोरेशन करोड़ो खर्च कर ले चुका है उसकी विस्वसनीयता व उपयोगिता की जाँच होना बहुत ही आवश्यक हो गया है जल्द ही उपभोक्ता परिषद् पूरे मामले पर प्रदेश के ऊर्जामंत्री व विद्युत नियामक आयोग के सामने रखेगा और पूरे मामले की उच्च स्तरी जाँच की मांग करेगा जब उपभोक्ता परिषद् ने इसके अंदर की बात पता की तो पता चला 2 अभियंता जो शक्ति भवन में उच्च पदों पर आसीन है वह अपनी तकनीकी पसंद की बिलिंग कम्पनियो को लाने में ज्यादा दिलचस्पी दिखा रहे निश्चित ही कौन सही कौन गलत इसकी पड़ताल कौन करेगा ?सवाल यह उठना लाजमी है की विभाग का हित क्या है कौन देखेगा ऊपर से कन्सलटेंटो का घालमेल उपभोक्ता पिश कर रह गया है।







