पूर्व सांसद सह देश के कद्दावर नेता शरद यादव ने उत्तर बिहार में आई बाढ़ को भयावह बताया और इससे निपटने के लिए सरकार की गंभीरता पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि उत्तर बिहार के जिलों में लगातार बारिश से बाढ़ की स्थिति भयावह हो गई है। बाढ़ की चपेट में बिहार के 10 जिले आ गए हैं। प्रभावित जिलों में सीतामढ़ी, शिवहर, सुपौल, किशनगंज, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, गोपालगंज, पूर्वी चंपारण, सहरसा और मधेपुरा शामिल है।

उन्होंने कहा कि इन दस जिलों में कई सड़कें ध्वस्त हो गई है कई लोगो के घरों और कार्यालयों में पानी भर गया है और कई जगह आवागमन बिल्कुल ठप हो गया है। हालात बहुत गंभीर बने हुए हैं। लगातार बारिश के चलते कोसी बैराज के 56 में से 48 फाटक को खोल दिया गया है। बाढ़ की स्थिति अगले कुछ दिनों में और बिगड़ने की आशंका है।
श्री यादव ने कहा कि नेपाल से बिहार आने वाली नदियां उफान पर हैं। गंडक, कोसी, बागमती, लखनदेई, बूढ़ी गंडक जैसी नदियों ने विकराल रूप धारण कर लिया है। पानी के तेज बहाव से सड़कों का संपर्क टूट गया है। लगातार हल्की बारिश के बीच नदियों के जलस्तर में उतार-चढ़ाव जारी है। राज्य में आधा दर्जन नदियां कहीं ना कहीं लाल निशान से ऊपर ही बह रही हैं।
उन्होंने कहा कि बिहार की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। एक तरफ सरकार ने कोरोना से निपटने के लिए पुख्ता इंतजाम नहीं किए और इंसान को इंसान ना समझने वाले दृश्य राज्य में देखने को मिल रहे हैं जो बहुत ही दर्दनाक और दयनीय है और दूसरी तरफ बाढ़ जोकि मालूम है हर साल विनाश करती है उसके लिए भी गंभीर रूप से सरकार तैयार नहीं थी।







