जी के चक्रवर्ती
दरअसल हमारे देश को आजादी दिलवाने वाले स्वत्रंतता संग्राम सेनानी के स्वमं के बलिदान के साथ ही साथ उनके अपने घर के नितांत सगे संबंधियों के प्राणों की परवाह किये बिना देश के खातिर अपना सर्वस्य भारत माँ के चरणों मे निछावर कर दिया। ऐसे ही शहीदों के बलिदान की वजह से आज भारत की भूमि और यहां के निवासी सभी जनों को आजादी हासिल हुई है। यदि हम आजाद और आजादी दोनों ही चीजें हम मनुष्यों द्वारा अनुभव करने की अवस्था हैं और यह तभी अनुभव होता है जब हम वास्तव में स्वतंत्र हो और हमे किसी भी चीज के लिये रोका-टोका या इजाज़त लेने की जरूरत ही न पड़े।
आज हमारे देश को आजादी मिले 74वर्ष हो चुके हैं लेकिन हमें सभी क्षेत्रों में जैसी तरक्की मिलना चाहिये थी वैसी तरक्की हमारा देश नही कर पाया, इसके बृहद कारणों में न जाकर संक्षेप में हमे यही कहेंगे कि देश के स्वत्रंता प्राप्त करते ही देश की सत्ता की बागडोर कुछ ऐसे खुदगर्ज नेताओं ने संभाली जिन्होंने देश के लिये नहीं बल्कि स्वमं के उत्थान के लिये काम करते रहे, जिसका नतीजा यह हुआ कि हमारे देश की वास्तविक तरक्की के स्थान पर केवल भ्रष्टाचार के मामले में तरक्कीयां होती रही और देश के सत्ता संभालने वाले लोगों ने एक लम्बे समय तक देश को दीमक की तरह चाट कर खोखला कर दिया। क्या हमारे स्वत्रंतता संग्राम में शहीद सेनानियों ने देश के इस दुर्दशा की परिकल्पना सपने में भी कभी की होंगी?
आज भी हमारे देश मे कुछ सरकारी विभागों में नियम कानून से लेकर शासन प्रणाली तक अंग्रेजी शासको के ढर्रे पर चलती नजर आती रही। वैसे प्रत्येक मनुष्यों के लिये आजादी का अर्थ और मूल्य अलग अलग हो सकता है, लेकिन 15 अगस्त 1947 के दिन देश को मिली आजादी का अर्थ प्रत्येक भारतवासियों के लिये एक जैसा है, यह अलग बात है कि आजादी का अर्थ अलग-अलग परिस्तिथियों में अलग स्थान पर अलग-अलग हो सकता है? लेकिन इसके मूलभूत अवस्था स्वत्रन्त्र होना प्रत्येक व्यक्ति के लिये एक जैसा है जैसे एक तरह की आजादी अपने देश मे घूमने फिरने से लेकर बोलने तक कि आजादी इसी तरह की एक शारीरिक आजादी और एक पारिवारिक आजादी इसी तरह और भी अनेको तरह की आजादीयां हमारे सामाजिक व्यवस्था से जुड़ी हुई है लेकिन इनमे से सबसे पहली आजादी देश की आजादी है क्योंकि किसी भी देश के लोग तभी आजाद कहलायेंगे जब वह देश स्वयं आजाद होगा।
इसी परिपेक्ष में हम कहें तो 15 अगस्त वर्ष 1947 को हमारे देशवासियों को आजादी जरूर मिली लेकिन क्या हमें पूरी तरह से आजादी मिली भी या नही, वास्तव में समाज मे हम आजाद हो कर घूम फिर सकें यह आजादी महत्वपूर्ण नही है, बल्कि हम किस तरह से और किस चीज के लिये आजाद हैं?







