उप्र पावर ऑफिसर्स एसोसिएशन का आरोप है कि बिना निजीकरण के पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम में सुधार किये जाने को लेकर पूरे प्रदेश के दलित व पिछड़े वर्ग के अभियंताओ के संघठन उत्तर प्रदेश पावर ऑफिसर्स एसोसिएशन द्वारा चलाये जा रहे आंदोलन में ऊर्जा मंत्री की अध्यक्षता में जब संगठन और प्रबंधन के बीच सुधारों को लेकर सहमति बन गयी और 31 मार्च की समय सीमा निर्धारित की जा चुकी थी तो उसके बाद पावर कार्पोरेशन उच्चप्रबंधन अपनी बात से मुकरना और तैयार प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने से मना कर देना एक गहरी साजिश की और इशारा करता है। एसोसिएशन का कहना है कि इससे पावर ऑफिसर्स एसोसिएशन सदस्यों के बीच गहरा रोष व्याप्त है और सभी सदस्यों के सामने आंदोलन पर जाने के अलावा कोई रास्ता नहीं हैं।
बता दें कि एसोसिएशन की केंद्रीय कार्यकारिणी ने बैठक के दौरान यह निर्णय लिया गया था कि पावर ऑफिसर्स एसोसिएशन के सभी सदस्य आज 4 बजे से अनिश्चितकालीन कार्यबहिष्कार पर जायेंगे। ऐसी स्थिति में प्रदेश की जनता को यदि किसी संकट का सामना करना पड़ता है तो इसके लिए पावर कारपोरेशन का शीर्ष प्रबंधन और उत्तर प्रदेश सरकार जिम्मेदार होगी।
इस सम्बन्ध में उप्र पावर ऑफिसर्स एसोसिएशन, के अध्यक्ष के बी राम कार्यवाहक अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा, उपाध्यक्ष एसपी सिंह, अति महासचिव अनिल कुमार, सचिव आरपी केन संगटन सचिव अजय कुमार महेंद्र सिंह आदर्श कौशल, आरएस प्रसाद, राम शब्द, सीबी सिंह, आनद कनौजिया, प्रेम चंद्र, मनोज सोनकर, एसएस आर्या एसके निर्मल, अजय कनौजिया, स्वेता सिंह राधेश्याम रंजीत कुमार अवनीश कुमार राजेश कुमार ने कहा कल से पूरे प्रदेश में दलित व पिछड़े वर्ग के अभियंता लगातार निजीकरण का विरोध करेगी और कार्यबहिस्कार जारी रखेंगे जिस प्रकार से पूरे प्रदेश में दलित व पिछड़े वर्ग के अभियंता सुधार के पक्षधर थे और पावर कार्पोरेशन के शर्तो के अनुसार सुधार पर अपनी सहमती दी थी उसके बावजूद पावर कार्पोरेशन ने मांगो को नहीं माना जिससे सभी दलित व पिछड़े वर्ग के अभियंता आंदोलित है इसलिये उप्र सरकार को अविलम्ब अपने निर्णय पर पुनर्विचार करते हुए टकराव के रास्ते से बचना चाहिए।
एसोसिएशन के अध्यक्ष ने कहा कि निजीकरण से सबसे ज्यादा नुकसान प्रदेश के दलित व पिछड़े वर्ग के अभियंताओ का है क्योंकि इससे उनका संवैधानिक आरक्षण भी छिनेगा ऐसे में सरकार को निजीकरण के फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए।







