दोस्तों, दिल्ली के बाबा का ढाबा का उदाहरण आज सभी के सामने है जिसमे सोशल मीडिया के पॉज़िटिव रेस्पॉन्स ने दिखा दिया कि प्यार की एकता में कितनी शक्ति है। किसी ने गरीब बाबा की तकलीफ को अपने स्तर से निपटते न देख उनकी परेशानी का वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया और फिर जो समाज के संवदनशील व्यक्ति है उन्होंने उन गरीब वृद्धों की ऐसी प्यार भरी मदद की जो इतिहास बन गयी। यहाँ सबसे बड़ी बात थी कि सभी ने जातिवाद से ऊपर उठकर सोचा और एकता कि मिशाल कायम की।
इसी सन्दर्भ में आज हम आपको एक ऐसी प्रेरक कहानी बता रहे हैं जिसमें यह सीख मिलती है कि आपके पास जो है उसे बांटने, बढ़ाने से ही वह जीवित रहता है। यानी ज्ञान और मदद को हमेशा एक दूसरे से शेयर करना चाहिए।

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एक गुरु के तीन प्रमुख शिष्य थे। इन तीनों में से किसी एक शिष्य को ही, जो योग्य हो उसे वो अपनी सारी जिम्मेदारी सौंपना चाहता था। उसने सोचा कि क्यों न वो तीनों की बुद्धिमत्ता को परखें। उसने कहा कि वो कुछ महीनों के लिए तीर्थ करने जा रहा है। उसने अपने शिष्यों को तीन थैलियां दीं जिसमें कुछ बीज थे। उसने कहा कि वो एक.एक थैली ले ले।
गुरु ने अपने शिष्य को इन बीजों को संभालकर रखने को कहा। साथ ही कहा कि वह जब लौटे तो यह बीज उसे वापस चाहिए। जब गुरु चला गया तो पहले शिष्य ने सोचा कि क्यों न वो अपने बीजों को किसी सुरक्षित जगह रख दें। वो उन बीजों को रोज थैली से निकालता और साफ कर दोबारा रख देता। वहीं दूसरे शिष्य ने सोचा कि इन्हें खराब होने से बचाने के लिए क्यों न इन्हें वो बाजार में बेच आए।
जब गुरुजी आएंगे तब वो दोबारा उन्हें खरीद लाएगा और उन्हें दे देगा। कुछ महीनों बाद जब उनके गुरु लौटे। उसने अपने शिष्यों को बुलाया और बीज मांगे। पहले शिष्य ने गुरु को थैली निकालकर दी। लेकिन इसमें सभी बीज सड़ गए थे। दूसरा शिष्य बाजार गया और बीज खरीदकर ले आया।
वहीं, तीसरे शिष्य ने उससे उसके बीजों के बारे में पूछा। उन्होंने पूछा कि तुमने क्या किया बीजों का वह शिष्य अपने गुरु को आंगन में ले गया और कहा कि यह देखिए जो बीज आपने उसे दिए थे वह असंख्य फूल बन गए है। गुरु यह देख बेहद खुश हो गया। फिर गुरु ने तीसरे शिष्य को अपना उत्तराधिकारी बना दिया।







