उत्तर प्रदेश में जहां एक ओर बेरोजगारी की समस्या को हल करने के लिए बड़े पैमाने पर प्रयास किए जा रहे हैं, वहीं ऐसे दौर में बेरोजगारों को ठगने का काम करने वाली कंपनियां भी सक्रिय हैं। इस तरह ये समस्या को और भी अधिक गंभीर बनाने का काम कर रही हैं और बेरोजगार इनके हाथों ठगे जाने के लिए मानों मजबूर हैं। एक खबर बताती है कि प्रदेश में रोजगार मेले में आने वाली कुछ कंपनियां छल कर रही हैं। अभी पिछले महीने नवम्बर में दो सौ से अधिक शिकायतें विभिन्न रोजगार कार्यालयों को मिली हैं। इस पर कड़ा अख्तियार करते हुए 13 ऐसी कंपनियों को ब्लैकलिस्ट भी किया गया है।
इन कंपनियों ने बेरोजगारों का चयन करते वक्त तय वेतन से कम भुगतान किया। तय घंटों से ज्यादा वक्त तक काम कराया। कई कंपनियां बेरोजगारों से वसूली करने लगीं। अकेले कानपुर में ऐसी 11 कंपनियां ब्लैकलिस्ट हुई हैं। कुछ जनपदों में भी धोखाधड़ी करने वाली ऐसी ही कंपनियां प्रकाश में आई हैं। हालांकि कंपनियों द्वारा बेरोजगारों को इस तरह से ठगे जाने का यह सिलसिला नया ही है क्योंकि अभी तक ऐसी बातें नहीं सुनी गई थीं और यह भी पता चलता है कि इस तरह की कंपनियों ने व्यापक स्तर पर पैर भी जमा लिए हैं।
यह तो नौकरी का सब्जबाग दिखाकर सीधी तौर पर धोखाधड़ी की बात है। बेरोजगारी की समस्या वैसे भी काफी बढ़ गई है और बड़ी संख्या में रोजगार की तलाश में युवा भटकते रहते हैं। ऐसे में जरूरी यह है कि रोजगार के नाम पर इस तरह ठगी करने वाली कंपनियों पर अंकुश लगाया जाय। इसके लिए सरकार को भी कदम उठाने होंगे और बेरोजगारों को भी सावधान रहना होगा।
हालाँकि सहायक नियोजन निदेशक एसपी द्विवेदी ने एक प्रेस में आधिकारिक बयान देकर कहा कि कानपुर में 11 कपिनियों पर रोक लगायी जा चुकी है कुछ ने सैलरी ज्यादा बताई और दी नहीं। कुछ पर बेरोजगारों ने पैसे मांगने के आरोप लगाए थे। अब इन कंपनियों को रोजगार मेले में मौका नहीं मिलेगा। लेकिन क्या इन सबसे युवाओं के सपनों का वास्तविक हल निकलने वाला है यह सोच का विषय है?







