सभी उपभोक्ताओ ने कई वर्षो तक भरा था रेगुलेटरी सरचार्ज
लखनऊ, 19 दिसंबर, 2020: उपभोक्ता परिषद ने कहा कि आज 24 दिसंबर राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस की पूर्व संध्या पर प्रदेश सरकार से यह मांग करते है कि प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओ का बिजली कम्पनियो पर वर्ष 2017-18 से लेकर अब तक उदय ट्रूप में निकले रुपया 13337 करोड़ उस पर केेरिग कॉस्ट व वर्ष 2020-21 में निकले रुपया 800 करोड़ कैरिंग कॉस्ट सहित कुल लगभग रुपया 19537 करोड़ निकल रहा है वह भी सभी पक्षों की सुनवाई के बाद नियामक आयोग ने तय किया है। ऐसे में सरकार को अगले 3 वर्षो तक 10 प्रतिशत बिजली दरों में कमी करने के लिए आगे आना चाहिए सभी को पता है कि प्रदेश में आने वाले समय में बिजली दरों में कमी होनी चाहिए का मुद्दा राजनैतिक पार्टियों के लिए एक बड़ा मुद्दा होगा ऐसे में सरकार को खुद सामने आके यह एलान कर देना चाहिए की अगले 3 वर्षो तक उपभोक्ताओ की बिजली दरों में 10 प्रतिशत की कमी हर साल होगी।
परिषद् ने कहा कि पावर कार्पोरेशन को यह नहीं भूलना चाहिए की जब प्रदेश की बिजली कंपनियों का उपभोक्ताओ के ऊपर ट्रूप में पैसा निकला था तो प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओ ने कई वर्षो तक पहले 3.71 और बाद में 4.28 प्रतिशत रेगुलेटरी सरचार्ज भरा था अब जब उपभोक्ताओ का पैसा बिजली कंपनियों पर निकल रहा और उनको लाभ मिलने का समय आया तो बिजली कम्पनिया क्यों पीछे हट रही ऐसे में जनता के हित में सरकार को आगे आकर उपभोक्ताओ को उनका हक दिलाना चाहिए।
पुनर्विचार याचिका दाखिल की गयी है: अवधेश कुमार वर्मा
इस मामले में उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा सरकार प्रदेश के उपभोक्ताओ को बिजली कंपनियों पर निकल रहे पैसे के एवज में उनकी दरों में कमी कराने के लिए केवल विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 108 के तहत विद्युत नियामक आयोग को जनहित में यह प्रस्ताव दे दे की उपभोक्ता परिषद द्वारा विद्युत नियामक आयोग में बिजली दरों में कमी कराने के लिए जो पुनर्विचार याचिका दाखिल की गयी है उसके तहत उपभोक्ता को लाभ दे इससे स्वत: प्रदेश के उपभोक्ताओ की बिजली दरे कम हो जाएंगी और समाज में एक पारदर्शी सन्देश भी जायेगा।







