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    भारत की वैज्ञानिक काल गणना

    ShagunBy ShagunApril 13, 2021 festival No Comments3 Mins Read
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    • डॉ दिलीप अग्निहोत्री

    भारतीय काल गणना आधुनिक खगोल विज्ञान के लिए भी चमत्कार से कम नहीं। क्योंकि इसका अविष्कार उस समय हुआ था जब दुनिया में अन्यत्र मानव सभ्यता नहीं थी। इसकाल आंकलन ईसापूर्व जैसी परिधि में संभव ही नहीं है। यह काल गणना पृथ्वी के प्रादुर्भाव से प्रारंभ होती है। यह शाश्वत है, चारों युग समाप्त होंगे, नए युगों का चक्र प्रारंभ होगा, लेकिन यह काल गणना तब भी इसी गति से चलती रहेगी। इसमें एक पल का भी अंतर नहीं आएगा।

    दुनिया की सर्वाधिक प्राचीन व वैज्ञानिक काल गणना का अविष्कार भारत में हुआ था। इसमें समय के न्यूनतम अंश का भी समावेश है। प्रलय के बाद भी यह काल गणना निरन्तर जारी रहेगी, प्रासंगिक रहेगी। इसके नव वर्ष में प्रकृति भी नए रूप में परिलक्षित होती है। यह संधिकाल आध्यात्मिक ऊर्जा को प्राप्त करने का अवसर होता है। इसमें पाश्चात्य नव वर्ष की तरह देर रात का हंगामा नहीं होता।

    भारतीय काल गणना में परमाणु से लेकर कल्प तक का विचार है। इसलिए यह पूर्णतया वैज्ञानिक है। भारतीय नव वर्ष का प्रथम दिन अपने में व्यापक सन्देश देने वाला होता है। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को ही पृथ्वी माता का प्रादुर्भाव हुआ। इसी के साथ ब्रह्मा जी ने काल गणना का श्री गणेश किया। नवरात्रि का प्रथम दिवस मत्स्यावतार,प्रभु श्री राम का राज्याभिषेक,धर्म राज युधिष्ठिर का राज्य तिलक इसी दिन हुआ था। यह सभी अवसर भारतीय संस्कृति को समृद्ध बनाने वाले है।

    पृथ्वी के प्रादुर्भाव के एक अरब सत्तानबे करोड़ उनतीस लाख उनचास हजार एक सौ बाइस वर्ष हो चुके है। इस अवधि में एक पल का भी अंतर नहीं हुआ है। यह भारतीय वैज्ञानिक काल गणना कि विशेषता है। इसकी बराबरी के विषय में दुनिया की अन्य काल गणना कल्पना भी नहीं कर सकती। ईसा पूर्व और ईसा बाद का प्रचलन तथ्य परक नहीं है। प्राचीन भारत के गुरुकुल अनुसन्धान के केंद्र हुआ करते थे।

    कालगणना में क्रमश: प्रहर, दिन-रात, पक्ष, अयन,संवत्सर, दिव्यवर्ष,मन्वन्तर, युग, कल्प और ब्रह्मा की गणना की जाती है।

    हमारे ऋषियों ने चक्रीय अवधारणा का सुंदर वर्णन किया। काल को कल्प,मन्वंतर,युग में विभाजित किया। चार युग बताए। सतयुग, त्रेता,द्वापर और कलियुग। इनकी चक्रीय व्यवस्था चलती है। अर्थात ये शाश्वत रूप से आते जाते है। इसकी पुनरावृत्ति होती रहती है।

    इसके अनुरूप इस समय ब्रह्मा की आयु के दूसरे खंड में,श्वेतावाराह कल्प में,वैवस्वत मन्वंर में अट्ठाईसवां कलियुग चल रहा है। इस कलियुग की समाप्ति के पश्चात चक्रीय नियम में पुन: सतयुग आएगा।

    भारतीय नव नववर्ष की मंगलकामना

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