Share Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp Post Views: 520 देख कर आँगन, छतें फिर याद घर आने लगा आग दिल में और कसक आँखों में बादल फिर घना छाने लगा। एक चिड़िया जिसने जंगल को किया आबाद था चीखना रोना उसी का दिल को धड़कने लगा आशा शैली
‘पुस्तकें मन को एकाग्र कर परंपराओं से जोड़ती हैं’-ब्रजेश पाठक; ईशा-मीशा रतन की कथक प्रस्तुति ने मोहा मन