नई दिल्ली, 07 सितम्बर 2021 : रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने हाल में बैंकों की ओर से उपलब्ध सेफ डिपॉजिट लॉकर और सेफ कस्टडी आर्टिकल सुविधा को लेकर नए नियम जारी किए हैं।इसके लिए आरबीआई ने बैंकिंग और टेक्नोलॉजी में बदलाव, कस्टमर्स की शिकायतों और बैंकों के साथ ही इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (आईबीए) के सुझावों को ध्यान में रखा है। इसके तहत अगर आपका किसी बैंक के साथ कोई लेनदेन नहीं है,तब भी सभी नियमों का पालन करने के बाद आपको लॉकर की सुविधा मिल सकती है। आसान शब्दों में समझें,तब अब किसी खास बैंक में लॉकर सुविधा लेने के लिए उसमें आपका अकाउंट होना जरूरी नहीं है। आरबीआई के नए निर्देश 2022 से लागू होगा।
बैंकों के सामने कई बार ऐसी स्थिति आ सकती है कि कस्टमर लॉकर को ऑपरेट नहीं करता और न ही रेंट का भुगतान करता है।इसके बाद लॉकर रेंट के भुगतान को सुनिश्चित करने के लिए बैंक अब लॉकर अलॉटमेंट के समय टर्म डिपॉजिट ले सकते है। यह तीन साल के रेंट और चार्जेज के बराबर होगा। इसके अलावा कोई अप्रत्याशित स्थिति होने पर बैंक लॉकर को खोल भी सकेंगे। हालांकि, बैंकों के मौजूदा लॉकर होल्डर्स और ऑपरेटिव अकाउंट रखने वालों को टर्म डिपॉजिट नहीं भरना होगा। वहीं, अब बैंक को ब्रांच मर्जर, बंद करने या शिफ्ट करने की स्थिति में दो समाचार पत्रों में नोटिस देना होगा। साथ ही ग्राहकों को लॉकर बदलने या बंद करने का विकल्प देने के साथ कम से कम दो महीने पहले सूचना देनी होगी।
किसी आपातस्थिति या प्राकृतिक आपदा के कारण बिना तैयारी के शिफ्टिंग करने के मामले में बैंक ग्राहकों को जल्द से जल्द सूचना देगा। भूकंप, बाढ़, बिजली गिरने, तूफान या ग्राहक की गलती या लापरवाही से हुए किसी नुकसान के लिए बैंक जवाबदेह नहीं होगा। हालांकि, बैंकों को ऐसी स्थितियों से परिसर को बचाने के लिए पुख्ता व्यवस्था करनी होगी। बैंक दावा नहीं कर सकते कि लॉकर में मौजूद सामान के नुकसान को लेकर कस्टमर्स के प्रति उनकी कोई जवाबदेही नहीं है।बैंक के कर्मचारी की ओर से की गई धोखाधड़ी के कारण हुए नुकसान की स्थिति में बैंक की देनदारी लॉकर के मौजूदा रेंट के 100 गुना तक राशि के बराबर होगी।केंद्रीय बैंक ने कहा है कि दावों के निपटारे के लिए बैंक के पास बोर्ड की ओर से मंजूर की गई पॉलिसी होनी चाहिए। बैंकों से नॉमिनेशन और नॉमिनी को लॉकर का सामान देने की पॉलिसी बनाने को भी कहा गया है।







