कर्मचारी व शिक्षकों का सरकार के प्रति दिखा जबरदस्त आक्रोश
ईको गार्डन में आयोजित महारैली में आज कर्मचारियों व शिक्षकों का आज सरकार के प्रति जबरदस्त आक्रोश दिखा l सभी ने एक आवाज में सरकार को चेताया कि यदि कर्मचारियों व शिक्षकों की पुरानी पेंशन बहाली मांगे नहीं मानी तो चुनाव में सरकार को कर्मचारियों व शिक्षकों के विरोध का सामना करना पड़ेगा l
पुरानी पेंशन बहाली सहित अपनी विभिन्न मांगों को लेकर लाखों की संख्या में शिक्षकों एवं कर्मचारियों ने कर्मचारी, शिक्षक, अधिकारी एवं पेंशनर्स अधिकार मंच (उप्र) के बैनर तले लखनऊ के ईको गार्डन में आयोजित महारैली में शामिल हुए l महारैली की अध्यक्षता मंच के अध्यक्ष डा. दिनेश चन्द्र शर्मा ने की।
उन्होंने धरने को सम्बोधित करते हुए कहा कि प्रदेश के कर्मचारियों के महंगाई भत्ते का 10 हजार करोड़ का भुगतान सरकार ने रोका हुआ है। एक दर्जन से अधिक भत्ते समाप्त कर दिये गये हैं। प्रधानाध्यापकों के लाखों पद सरकार द्वारा समाप्त कर दिये गये और पिछले 05 वर्ष के कार्यकाल में एक भी शिक्षक को पदोन्नति नही दी गयी है। शिक्षा मित्र व अनुदेशकों को भुखमरी की कगार पर लाकर खड़ा कर दिया है। आंगनवाड़ी एवं रसोईयां आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं, परन्तु फिर भी सरकार नहीं सुन रही है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने समय रहते शिक्षकों एवं कर्मचारियों की मांगों को पूरा नहीं किया तो वे सरकार से आर-पार की लड़ाई लड़ेंगे।

उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के महामंत्री संजय सिंह ने कहा कि सरकार के पास अपने शिक्षकों एवं कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान हेतु यह आखिरी मौका है। सरकार को हमारी मांगों के प्रति गंभीर व संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाते हुए सार्थक प्रयास करने की आवश्यकता है।

मंच के प्रधान महासचिव सुशील त्रिपाठी ने कहा कि राज्य कर्मचारियों की अनेक समस्यायें सरकार के सामने समाधान हेतु कई बार प्रस्तुत की गयीं परन्तु सरकार ने उस पर कोई ध्यान नहीं दिया। कर्मचारियों के साथ सरकार सौतेला व्यवहार कर रही है। आज की महारैली ने यह साबित कर दिया कि प्रदेश के शिक्षकों एवं कर्मचारियों के अन्दर सरकार के प्रति बहुत आक्रोश है जिसका खामियाजा सरकार को आने वाले विधान सभा चुनाव में चुकाना पड़ सकता है।
उ0प्र0 राज्य कर्मचारी संयक्त परिषद के प्रदेश अध्यक्ष इं0 हरिकिशोर तिवारी ने कहा कि सरकार ने प्रदेश के शिक्षकों एवं कर्मचारियों का पिछले डेढ़ साल के बढ़े हुए महंगाई भत्ते का भुगतान न करके शिक्षकों एवं कर्मचारियों का भारी नुकसान किया है। तयशुदा कैश लेस इलाज सुविधा को लागू नही किया। संविदा कर्मियों से बंधुवा मजदूर की तरह कार्य लिया जा रहा है। उन्हें सरकार द्वारा नियमित न करके यह प्रदर्शित किया जा रहा है कि सरकार का मानवीय मूल्यों में कोई विश्वास नही है।







