Close Menu
Shagun News India
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Friday, October 2
    Shagun News IndiaShagun News India
    Subscribe
    • होम
    • इंडिया
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • राजस्थान
    • खेल
    • मनोरंजन
    • ब्लॉग
    • साहित्य
    • पिक्चर गैलरी
    • करियर
    • बिजनेस
    • बचपन
    • वीडियो
    • NewsVoir
    Shagun News India
    Home»ब्लॉग

    क्या मुफ्त का सौदा अच्छा है ?

    ShagunBy ShagunApril 16, 2022Updated:April 16, 2022 ब्लॉग No Comments3 Mins Read
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Post Views: 718

    जी के चक्रवर्ती

    देश के जिन राज्यों पर कर्ज का सबसे ज्यादा बोझ है उनमें पंजाब, दिल्ली, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे राज्य शामिल हैं। इन राज्यों की लोकलुभावन घोषणाओं की वजह से इनकी वित्तीय स्थिति खराब है। इसी तरह जब से राजस्थान और छत्तीसगढ़ के राज्यों अपने यहां पुरानी पेंशन स्कीम पुनः बहाल करने की घोषणा की है और राज्य में मुफ्त बिजली भी दे रहे हैं इससे सरकारी खजाने पर बोझ बढ़ना स्वाभाविक है।

    आज हमारे देश मे मुफ्त नाम का शब्द बहुत प्रचलित है, मुफ्त शब्द के आते ही प्रोलोभन दिये जाने का स्वतः आभास हो जाता है जैसे अमुक चीज के साथ अमुक चीज मुफ्त फ्री है। सरकार कोरोना के कारण लोगों को मुफ्त राशन दे रही है ऐसी बातें सुनते ही लोगों की बांछे खिल उठती है, खैर कोरोना काल मे यदि सरकार मुफ्त में गरीबों को राशन नही देती तो शायद देश के गरीबों का स्तर और भी निचले स्तर तक पहुंच जाता। खैर यह एक अलग विषय है।

    राजनीति में मुफ्त में दिये जाने वाली चीजों की बात कोई नयी नही है जैसे ही देश मे चुनावों का समय निकट आता है वैसे ही के मुफ्त खोर और मुफ्त खोरी का व्यासन जोर पकड़ने लगता है जिससे नेताओं द्वारा मुफ्त में अनेको तरह की सुविधाओं वाली वस्तुओं को देकर मतदाताओं को बेवकूफ तो बनाया ही जाता है बल्कि जनता के अन्दर एक मुफ्त खोरी का आदत बना कर उन्हें अकर्मण्यता की ओर ढकेलने का भी काम करती है। इस तरह से देश के नेता नगरी के लोग और सरकारें अगले 5 वर्षो तक जनता को ठगने और लूटने का उपक्रम में लोकलुभावन वादें करके सिर्फ वोट बटोरने के उद्देश्य से देश मे मुफ्त मे अनेको चीजों एवं सुविधाओं को बांटने से सरकारों के आर्थिक खर्चों पर बोझ पड़ना स्वाभाविक हैं जिससे देश व राज्यो में चलने वाले अनेकों तरह की योजनाओं को रोक दिये या रुक जाने से असंतुलन की स्थिती पैदा हो जाती है।

    आज यदि हम भारत के विभिन्न राज्यों पर लदें कर्ज की बात करें तो वित्त वर्ष 2020-21 में देश के विभिन्न राज्यों का औसतन कर्ज उनके सकल घरेलू उत्पाद का लगभग एक तिहाई यानिकि लगभग 31.3 फीसदी तक के ऊंचे स्तर तक पहुंच चुका है। जबकि वित्त वर्ष 2021-22में कर्ज और जीएसडीपी (ग्रॉस स्टेट डोमेस्टिक प्रॉडक्ट) का अनुपात सबसे ज्यादा पंजाब का 53.3 फीसदी रहा है।

    राज्यों का औसत कर्ज उनके जीडीपी के 31.3 फीसदी पर पहुंच गया है। वहीं यदि हम राज्यों की बात करें तो आज सभी राज्यों का कुल राजस्व घाटा के 17 वर्ष के अपने उच्च स्तर 4.2 फीसदी पर पहुंच चुका है।

    जिसमे सबसे खराब स्थिति पंजाब राज्य की है जिसका कर्ज उसके जी.एस.डी.पी (ग्रास स्टेट डोमेस्टिक प्रॉडक्ट) का रिकॉर्ड 53.3 फीसदी तक पहुंच चुका है। दूसरे सबसे खराब हालत में राजस्थान है, जिसका कर्ज उसके जी.एस.डी.पी का 39.8 फीसदी तक हो चुका है। इसी प्रकार पश्चिम बंगाल का कर्ज 38.8 फीसदी, केरल का 38.3 फीसदी, गुजरात 23 फीसदी, महाराष्ट्र 20 फीसदी और आंध्र प्रदेश का कर्ज उसके जी.एस.डी.पी का 37.6 फीसदी तक जा पंहुचा है। इस तरह कहीं जी.एस.डी.पी भारत के पड़ोसी देश श्रीलंका जैसी न हो जाये।

    किसी भी सत्तारूढ दल को जनता की गाढ़ी मेहनत की कमाई को लुटाने के लिये नहीं, बल्कि उस धन का सदुपयोग जनता के हित में करने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है।

    नोट: यह लेखक के अपने निजी विचार हैं, अपनी प्रतिकिया व्यक्त करने के लिए इस मेल एड्रेस editshagun@gmail.com पर सन्देश भेजें।

    Shagun

    Keep Reading

    Victory in the Banda seat will now become a reality for the SP!

    सपा के लिए बांदा सीट की विजय अब बनेगी हकीकत!

    The future belongs to clean, green, and sustainable energy: A. K. Sharma

    आने वाला समय स्वच्छ, हरित व टिकाऊ ऊर्जा का: ए. के. शर्मा

    नालसा का एलएडीसी सिस्टम खत्म करने का फैसला: क्या गरीब कैदियों से छिन जाएगा न्याय का सहारा?

    68,500 Teacher Recruitment: Candidates lay siege to Minister's residence, demanding implementation of reservation orders.

    68500 शिक्षक भर्ती: आरक्षण आदेश लागू करो, मंत्री आवास पर अभ्यर्थियों का घेराव

    Nepal Flood Tragedy: The Most Harrowing Incident of Devastation

    नेपाल बाढ़ त्रासदी: तबाही का सबसे दर्दनाक हादसा

    रक्षाबंधन: परंपरा, पहचान और बाजारवाद का संगम

    Leave A Reply Cancel Reply

    Advertisment
    Google AD
    We Are Here –
    • Facebook
    • Twitter
    • YouTube
    • LinkedIn

    EMAIL SUBSCRIPTIONS

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    About



    ShagunNewsIndia.com is your all in one News website offering the latest happenings in UP.

    Editors: Upendra Rai & Neetu Singh

    Contact us: editshagun@gmail.com

    Facebook X (Twitter) LinkedIn WhatsApp
    Popular Posts

    Razorpay के व्यापारी अब बिना कार्ड विवरण दर्ज किए और OTP का इंतज़ार किए ऑनलाइन व स्टोर में Apple Pay स्वीकार कर सकते हैं

    October 1, 2026
    Nyrraa M Banerji’s Glamorous Style in Front of the Camera

    हर फ्रेम में छाईं न्यारा एम बनर्जी, दिखा स्टाइलिश अंदाज

    October 1, 2026
    Aman Sehrawat Receives Major Brand Recognition After Winning Olympic Bronze

    ओलंपिक कांस्य के बाद अमन सहरावत को मिला बड़ा ब्रांड सम्मान

    October 1, 2026
    "Books focus the mind and connect it with traditions" - Brajesh Pathak; Isha-Misha Ratan's Kathak performance captivated the audience

    ‘पुस्तकें मन को एकाग्र कर परंपराओं से जोड़ती हैं’-ब्रजेश पाठक; ईशा-मीशा रतन की कथक प्रस्तुति ने मोहा मन

    October 1, 2026
    Youth dies after venomous insect bite; family delayed seeking medical help by relying on faith healing; he breathed his last on the way to the hospital.

    जहरीले कीड़े के काटने से युवक की मौत, झाड़-फूंक में उलझा रहा परिवार,रास्ते में तोड़ा दम

    October 1, 2026

    Subscribe Newsletter

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    Privacy Policy | About Us | Contact Us | Terms & Conditions | Disclaimer

    © 2026 ShagunNewsIndia.com | Designed & Developed by Krishna Maurya

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.

    Newsletter
    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading