- उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने नियामक आयेाग अध्यक्ष के साथ की बैठक और दाखिल किया एक जनहित प्रत्यावेदन कहा गाॅंव की बिजली दर में सबसे ज्यादा वृद्धि इसलिये ग्रामीण जिलों में सार्वजनिक सुनवाई होना जरूरी
- आयोग अध्यक्ष का आश्वासन किसी के दबाव में आयोग नही लेगा निर्णय विद्युत अधिनियम 2003 के प्राविधानों के तहत ही करेगा आगे की कार्यवाही
लखनऊ, 15 सितम्बर। प्रदेश की बिजली कम्पनियों द्वारा मल्टी ईयर टैरिफ के अन्तर्गत वर्ष 2017-18 के लिये प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं की दरों में व्यापक वृद्धि पर नियामक आयोग द्वारा होने वाली सुनवाई के क्रम में उ0 प्र0 राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने आज नियामक आयोग अध्यक्ष श्री एस के अग्रवाल से मुलाकात कर लम्बी बैठक की और एक जनहित प्रत्यावेदन सौंपा। उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष द्वारा आयोग के सामने यह मुददा उठाया गया कि इस बार मल्टी ईयर टैरिफ के तहत बिजली दर पर सुनवाई आयोग द्वारा कानपुर, नोएडा, लखनऊ व बनारस में तय की गयी है। परन्तु प्रदेश के किसी भी ग्रामीण जिले में आम जनता की सुनवाई न किया जाना उचित नही है। इस बार सबसे ज्यादा बिजली दरों में वृद्धि ग्रामीण विद्युत उपभोक्ताओं की अधिकतम लगभग 350 प्रतिशत व किसानों की लगभग 70 प्रतिशत प्रस्तावित की गयी है। ऐसे में इन चारों शहरों में नाम मात्र ग्रामीण व किसान रहते हैं। ऐसे में ग्रामीण व किसानों की बात कैसे आयेगी। इसलिये यह बहुत ही आवश्यक है कि सभी बिजली कम्पनियों में कम से कम 4 ऐसे अतिरिक्त जिलों में सार्वजनिक सुनवाई करायी जाये जहाॅं ग्रामीण व किसान अपनी व्यथा रख सकें। जब एकल वर्ष की टैरिफ जारी होती थी तो 5 से 6 सुनवाई हो जाती थीं ऐसे में इस बार कम क्यों?
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने आयोग के सामने यह भी मुददा उठाया कि पावर कारपोरेशन के कुछ उच्चाधिकारी नगर निगम चुनाव आचार संहिता के पहले जल्दबाजी में आम जनता की सार्वजनिक सुनवाई की महज औपचारिकता पूरी कराकर बिजली दर में व्यापक बढोत्तरी का आदेश जारी कराना चाहते हैं। आयोग द्वारा यदि ऐसा किया गया तो निश्चित तौर पर पूरे प्रदेश में व्यापक विरोध होना स्वाभाविक है। आयोग एक अर्धन्यायिक संस्था है। बिजली दर जारी करने के लिये विद्युत विद्युत अधिनियम 2003 के प्राविधानों के तहत आयोग के पास एआरआर स्वीकृति के होने के दिन से अधिकतम 120 दिन का समय है। ऐसे में आयोग स्वतः पारदर्शी तरीके से स्वतंत्र होकर ज्यादा से ज्यादा आम जनता की राय लेकर बिजली दर पर अपना अंतिम निर्णय लें।
नियामक आयोग अध्यक्ष श्री एस के अग्रवाल ने उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष को यह आश्वासन दिया कि उपभोक्ता परिषद की प्रदेश के ग्रामीण जनपदो में सार्वजनिक सुनवाई की मांग पर आयोग पूरी गंभीरता से विचार करेगा। आयोग का भी मत है कि बिजली दर पर आम जनता की ज्यादा से ज्यादा राय ली जायें। जहाॅं तक सवाल है किसी के दबाव में टैरिफ जारी करने का आयोग नियमों के परिधि मंे रहकर विद्युत अधिनियम 2003 के प्राविधानों के तहत ही अपनी कार्यवाही पूरी करेगा।






